ईरान ने भारतीय एलपीजी जहाजों को दिया रास्ता

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): भारत में गहराते रसोई गैस संकट के बीच एक बड़ी और राहत भरी कूटनीतिक जीत सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत में कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति 80 प्रतिशत तक गिर चुकी थी और सिलेंडर की कीमतें 2,300 के पार पहुँचने से रेस्टोरेंट व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ठप होने की कगार पर था। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली सीधी और निर्णायक बातचीत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस चर्चा की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ बातचीत में क्षेत्र की गंभीर स्थिति और बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की गई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध के कारण आम नागरिकों की जान जाने और बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा संसाधनों का निर्बाध आवागमन भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाली का आग्रह भी किया। इस चर्चा के साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई गहन वार्ता के बाद जहाजों को हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हुआ। ईरानी राजदूत मोहम्मद फताली ने इस निर्णय को दोनों देशों की अटूट मित्रता का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान का भाग्य और हित एक समान हैं, इसीलिए युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में भी ईरान अपने मित्र राष्ट्र की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल करे भारत: शशि थरूर
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध पर शनिवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तभी खुल सकता है जब युद्ध खत्म होगा, क्योंकि ईरान के पास दुनिया पर दबाव बनाने के बहुत कम तरीके हैं। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान कमजोर स्थिति में है। थरूर ने मीडिया रिपोट्र्स का हवाला देते हुए कहा कि 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और करीब पांच हजार ईरानी भी मारे गए हैं। संघर्ष का संतुलन पूरी तरह ईरान के खिलाफ रहा है। ईरान में ज्यादा तबाही मची है और उस पर ज्यादा मिसाइल हमले हुए हैं, जबकि ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से अन्य जगहों पर कम हमले हुए हैं। इसलिए ईरान फिलहाल हमलों का ज्यादा शिकार हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, ऐसी स्थिति में ईरान दुनिया के लिए तेल आपूर्ति, जहाजों की आवाजाही और हवाई मार्ग को सीमित करके चीजों को मुश्किल और महंगा बना सकता है। यही उसका दबाव बनाने का तरीका है।