नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से दुनिया के ज्यादातर देश प्रभावित हैं। भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने तो युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है। भारत सरकार ने भी हालातों को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत प्राकृतिक गैस की सप्लाई को नियंत्रित करने का निर्देश दे दिया है। इस अधिनियम के तहत सबसे पहले घरों में पाइप से मिलने वाली पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी को प्राथमिकता दी जाएगी। सोमवार को ही कमर्शियल सिलेंडरों की अचानक किल्लत होने से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में चिंता बढ़ने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। इसके अलावा सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच का अंतराल भी 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि जमाखोरी और काला बाजारी रोकी जा सके। इससे पहले शनिवार को देश में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम में भी इजाफा किया गया था। गैस आपूर्ति बाधित होने का असर मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में दिखने लगा है। इन दोनों शहरों में होटल और रेस्टोरेंट को रसोई गैस उपलब्ध कराने में मुश्किल हो रही है। इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने मंगलवार को कहा कि गैस की किल्लत तेजी से बढ़ रही है और अगर जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो यह सेक्टर प्रभावित हो सकता है। घरेलू उपभोक्ताओं को कुकिंग गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत की तेल रिफाइनरियों ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम’ गैस (एलपीजी) का उत्पादन करीब 10 प्रतिशत बढ़ा दिया है।
गुजरात में गैस आपूर्ति पर प्रतिबंध:
गुजरात सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर औद्योगिक गैस के उपयोग में 50 फीसदी की कटौती की है। राज्य के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने घरेलू एलपीजी वितरण में कोई बाधा न आने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं ताकि घरों में खाना पकाने वाली गैस की कमी न हो। सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता देने के लिए कुछ औद्योगिक उपयोगों पर प्रतिबंध लगाए हैं। उद्योगों को गैस आपूर्ति में 50 फीसदी की कटौती की गई है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू:
एक सरकारी सूत्र ने बताया कि स्थिति की निगरानी और एलपीजी के सही वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू नहीं किया गया है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ऊर्जा उपलब्धता के मामले में भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है।अधिकारियों के अनुसार, सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने के लिए कई देशों के साथ लगातार संपर्क में है।सूत्रों ने बताया कि पहले कुछ चिंताएं जरूर थीं, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है।
कॉमर्शियल एलपीजी सप्लाई के लिए समिति:
ईरान में जारी जंग के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि दुनियाभर में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई बाधित हो सकती है। भारत में इसका मामूली असर दिखना शुरू ही हुआ था कि सरकार ने इसके तुरंत निदान के लिए 3 मेंबर्स की कमेटी बना दी है।दरअसल कई रेस्तरां ने शिकायत की थी कि उन्हें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे दुकानें बंद करने की नौबत कर आ गई है। इसके बाद सरकार तुरंत हरकत में आ गई और इन समस्याओं के निदान की तैयारी कर ली गई है। सूत्रों ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अलग-अलग रेस्टोरेंट एसोसिएशन से बात करेंगी ताकि LPG सप्लाई की उनकी दिक्कतों को समझा जा सके। इसके लिए सरकार ने IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स वाली 3 मेंबर्स की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी जरूरतों के हिसाब से सप्लाई को रीप्रायोरिटाइज़ भी करेगी। रीप्रायोरिटाइजेशन की वजह से पिछले कुछ दिनों में घरेलू LPG प्रोडक्शन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। LPG और LNG का कंसाइनमेंट अलग-अलग सोर्स से आ रहा है। बहुत जल्द LPG/LNG का कुछ नया कंसाइनमेंट आने की उम्मीद है।सरकार का दावा है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का कोई संकट नहीं है। इंडियन रिफाइनरियां पूरी कैपेसिटी से चल रही हैं जैसे वे ईरान-इजराइल लड़ाई से पहले चल रही थीं। सूत्रों ने कहा कि हम अपनी 70 फीसदी क्रूड ऑयल सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के अलावा दूसरे सोर्स से ले रहे हैं।




