भोपाल (मध्य स्वर्णिम): प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो गया है। इस चरण में सरकार को आरक्षित मूल्य से करीब 173 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति हुई है। हालांकि पांच जिलों में कुछ समूहों के लिए एक भी निविदा प्राप्त नहीं हुई, जिसके चलते वहां पुनः टेंडर प्रक्रिया कराई जाएगी। भोपाल, अलीराजपुर, अनूपपुर, मुरैना और नीमच जिलों के कुछ समूहों में किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। इन जिलों के संबंधित समूहों के लिए अब दोबारा निविदा आमंत्रित की जाएगी। भोपाल में शराब दुकानों के नए ठेकों की प्रक्रिया इस बार आसान नहीं दिख रही है। नई आबकारी नीति के तहत 87 कम्पोजिट शराब दुकानों की ई-नीलामी शुरू तो हो गई, लेकिन पहले चरण में रखी गई 29 दुकानों के लिए एक भी टेंडर जमा नहीं हुआ। अब इन दुकानों के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पिछले साल तक जिले की सभी दुकानें 4 बड़े समूहों में थीं। इस बार सरकार ने व्यवस्था बदलते हुए 87 दुकानों को 20 छोटे समूहों में बांट दिया है। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि छोटे और नए कारोबारी भी आसानी से ठेका ले सकें और बड़े ठेकेदारों का दबदबा कम हो।
238 करोड़ मिलेगा अतिरिक्त राजस्व:
विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बड़े समूहों को तोडऩे के कारण कुछ बड़े ठेकेदार सक्रिय नहीं हुए। वहीं बाजार में घाटे की चर्चा भी की जा रही है। हालांकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में फरवरी तक कई समूहों को 50 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ हुआ है। ऐसे में घाटे की बातों पर सवाल उठ रहे हैं। नई व्यवस्था से सरकार को करीब 238 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आने वाले चरणों में बेहतर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।




