बारूदी दुर्गंध की आगोश में पश्चिम-मध्य एशिया

0

नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): ईरान-इजरायल युद्ध का आज तीसरा दिन है। दोनों ही तरफ से हमले तेज हो गए हैं और लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। दोनों ही देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और आम इलाकों पर हमले हो रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के रेड क्रिसेंट ने अब तक मरने वालों की संख्या कम से कम 550 बताई है। इस हमले में ईरान के 131 शहर चपेट में हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमान ने बताया कि शनिवार को अपना अभियान शुरू करने के बाद से अमेरिकी सेना ने अब तक एक हजार से अधिक ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। इन ठिकानों में कमान एवं नियंत्रण केंद्र- आईआरजीसी संयुक्त मुख्यालय- आईआरजीसी एयरोस्पेस मुख्यालय – एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली- बैलिस्टिक मिसाइल केंद्र- ईरानी नौसेना के जहाज- ईरानी नौसेना की पनडुब्बियां- जहाज-रोधी मिसाइल केंद्र सैन्य संचार क्षमताएं शामिल है। ईरान के सुप्रीम नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका और इजरायल ने बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स और नौसेना के जहाज शामिल थे। गोलीबारी और मिसाइल हमलों के कारण ईरान में मरने वालों की संख्या 555 से ऊपर पहुंच गई है, जबकि हजारों घायल हैं और कई शहरों में भारी तबाही हुई है।

पीएम मोदी ने की बातचीत:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा से फोन बात की। उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और पीएम मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से भी बात की। नरेंद्र मोदी ने बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से अलग-अलग टेलीफोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही उन्होंने बहरीन और सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कुशलक्षेम को लेकर भी चर्चा की। क्षेत्रीय हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर भी नेताओं के बीच विचार-विमर्श हुआ।


अमेरिका और ब्रिटेन के बीच तनातनी:

पश्चिम एशिया में चल रहे घमासान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के बीच तनातनी एक बार फिर सतह पर आ गई। ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन द्वारा अमेरिकी वायुसेना को डिएगो गार्सिया स्थित अपने एयर बेस के इस्तेमाल की शुरू में अनुमति न देना राष्ट्रपति ट्रंप को बेहद खराब लगा है।उन्होंने एक साक्षात्कार में अपनी हताशा जाहिर की है। हालांकि, ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन इस युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन बाद में कहा कि अमेरिका डियागो गार्सिया के बेस का इस्तेमाल कर सकता है। बता दें कि इससे पहले भी ग्रीनलैंड और टैरिफ जैसे मुद्दों पर ट्रंप और स्टार्मर के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं।

वैश्विक बाजारों पर असर:
ईरान-इजरायल युद्ध से तेल की कीमतों में उछाल आई है। क्रूड तेल स्पॉट की कीमतें 10-13 त्न तक बढ़ीं, जिससे $80-$82 प्रति बैरल के पार पहुंचने की आशंका बढ़ी है। सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, क्योंकि निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर भाग रहे हैं। इससे वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल और जोखिम की भावना बढ़ी है।