मुंबई (मध्य स्वर्णिम): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में कहा कि अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे, यह 1947 का भारत नहीं है। उन्होंने कहा कि 2047 में अखंड भारत के उदय की कल्पना करनी चाहिए। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम के दूसरे दिन पहले सत्र को संबोधित कर रहे थे। डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि गुंडागर्दी कभी किसी पूरे समाज का दोष नहीं होती है। समाज की सजगता से विघातक गतिविधियों के नियंत्रण में सहायता मिलती है। संघ प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2047 में अखंड भारत के उदय की कल्पना करनी चाहिए। अब भारत को तोडने वाले टूट जाएंगे, यह 1947 का भारत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिख समाज से हमारा खून का रिश्ता है। हमारे बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। केशधारी और सहजधारियों के बीच वैवाहिक संबंध होते ही हैं। श्री गुरू ग्रंथ साहिब में केवल सिख संतों की नहीं, पूरे देश के संतों की वाणी है। हिंदू और सिख एकता का उल्लेख करने से वे अलग हैं। दो हैं ऐसा लग सकता हैं। वह गलत है। कारण हम सब एक ही हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि संविधान सम्मत जो भी आरक्षण हैं, उसे संघ का समर्थन है। जातिगत भेदभाव के सभी कारण पूरी तरह से समाप्त होने चाहिए। वंसत महोत्सव में हमारे तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस के भाषण पर आधारित पुस्तक सामाजिक समरसता और हिन्दुत्व में हमारा विचार पूरी तरह से स्पष्ट है।




