विशाल रजक, तेन्दूखेड़ा (मध्य स्वर्णिम): बाघों से गुलजार हो रहे वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद बाघों में से 22 तो पहली बाघिन राधा के वंशज हैं जबकि बाकी को रेस्क्यू कर नौरादेही लाया गया है एक बाघ स्वतः ही यहाँ पहुंचा है सबसे पहली बाघिन राधा को भी कान्हा टाइगर रिजर्व से लाया गया था वह भी अनाथ थी और चार दिन पहले कान्हा से ही एक और बाघ लाया गया है वह भी अनाथ है बाघ शिफिटिंग के दौरान अप्रैल 2018 में बांधवगढ़ की अनाथ बाघिन को नौरादेही लाया गया था जिसे राधा नाम दिया गया कुछ माह बाद ही एक बाघ लाया गया जिसे किशन नाम दिया गया राधा किशन की जोड़ी नौरादेही अभ्यारण्य में रम गई और मई 2019 में नौरादेही अभ्यारण्य में शावकों की आवाज गूंजी और नौरादेही में बाघों का कुनबा बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया कुछ माह बाद ही नौरादेही में अन्य स्थान से आया बाघ दिखाई दिया तथा वह भी नौरादेही अभ्यारण्य में रम गया उसका भी बाघ वंशवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा हालांकि इसी बाघ से हुए संघर्ष में घायल होने के बाद पहले बाघ किशन की मौत हो गई लगातार बढ़ रहे बाघों के कुनबा के बीच अप्रैल 2024 में बांधवगढ़ की आदमखोर बाघिन को यहाँ पर लाया गया था फरवरी 2025 में पेंच से उस बाघिन का रेस्क्यू भी यहाँ किया गया था जो कि सूअर के शिकार के दौरान सूअर सहित कुर्रा में गिर गई थी।
टेरिटरी बनाने लगातार मूवमेंट कर रहा बाघ:
कान्हा से लाया गया बाघ अपनी टेरिटरी बनाने के लिए लगातार मूवमेंट कर रहा है टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीमें बाघ पर कॉलर आईडी की मदद से नजर रखे हुए हैं बताया जा रहा है कि बाघ को जब से टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है तब से वह लगातार जंगल में विचरण कर रहा है विशेषज्ञों की माने तो नए जंगल में बाघ शुरुआती एक सप्ताह तक एक निश्चित ठिकाने पर नहीं रहता है वह क्षेत्र को पूरी तरह से देखता है और फिर अपनी टेरिटरी और रुकने का एक तय ठिकाना बना लेता है मोहली रेंज में 30 से 50 अधिक अधिकारियों कर्मचारियों की टीमें लगातार सक्रिय होकर निगरानी कर रही है।
बाघ का ननिहाल है टाइगर रिजर्व:
कान्हा टाइगर रिजर्व से लाए बाघ की कहानी संघर्षों से भरी हुई है 4 महीने की उम्र में मां से बिछड़ गया जिसके बाद उसे कान्हा टाइगर रिजर्व में लाया गया और घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़े में रखकर शिकार और जंगल में घूमने का प्रशिक्षण दिया धीरे-धीरे जंगल में चहलकदमी बढ़ाई और अपना दायरा बढ़ाते हुए शिकार किए तीन साल की उम्र होने के बाद उसे वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया कान्हा टाइगर रिजर्व से आए इस बाघ टाइगर रिजर्व (नौरादेही) का वातावरण पसंद आने लगा है और अपनी टेरिटरी बनाने जंगल में विचरण कर रहा है यहां न सिर्फ उसका लंबा मूवमेंट देखा जा रहा है दरअसल नौरादेही अभ्यारण्य उसका ननिहाल भी है क्योंकि यहां पर बाघिन राधा जिसने इस क्षेत्र को आबाद किया उसका जन्म भी पेंच में हुआ था।
बढ़ेगा बाघों का कुनबा:
टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक टाइगर रिजर्व लाए गए नए बाघ से यहां पहले से मौजूद बाघ और उनकी संतान में भविष्य में परिवर्तन देखने मिलेगा मेहमान बाघ से जो नई संतान पैदा होगी उनके जीन में बदलाव होगा इन ब्रीडिंग के चांस कम होंगे जिससे भविष्य की बाघों की पीढ़ी नए जीन के साथ जन्म लेंगे जो किसी भी संरक्षित वन के वन्य प्राणियों के लिए काफी अच्छा माना जाता है वर्ष 2018 में बाघ पुर्नस्थापना के तहत बाघिन राधा और बाघ किशन को छोड़ा गया था जहां आज टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है रिजर्व प्रबंधन लगातार बाघों के रहवास विकास वन और वन्य प्राणी संरक्षण में कार्य कर रहा है बता दें वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही अभ्यारण्य) पन्ना टाइगर रिजर्व और रातापानी टाइगर के बीच कोरिडोर निर्मित करता है इस कारण अन्य संरक्षित क्षेत्र से यहां बाघ आते-जाते रहते हैं।
लगातार निगरानी व मॉनिटरिंग:
टाइगर रिजर्व के नए डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व आए बाघ की लगातार निगरानी व मॉनिटरिंग की जा रही है बाघ रेडियो कॉलर पहने हुए हैं जिससे मॉनिटरिंग की जा रही है।




