जब तक धर्म से चलता रहेगा भारत, ‘विश्वगुरु’ बना रहेगा : भागवत

0

नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक भारत का मार्गदर्शन धर्म करता रहेगा, तब तक देश ‘विश्वगुरु’ बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में देखने को नहीं मिलता। यह ज्ञान हमारे पूर्वजों की अमूल्य विरासत है और साधु-संतों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है। एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे मोहन भागवत ने कहा, कि धर्म केवल पूजा-पाठ या किसी संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे ब्रह्मांड को चलाने वाला मूल सिद्धांत है। उन्होंने कहा, धर्म ही पूरे ब्रह्मांड का चालक है। जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई, तब जो नियम उसकी कार्यप्रणाली को नियंत्रित करते थे, वही धर्म बने। सब कुछ उन्हीं सिद्धांतों पर चलता है। आरएसएस प्रमुख ने उदाहरण देते हुए कहा, कि जैसे पानी का धर्म बहना है और आग का धर्म जलाना है। वैसे ही हर व्यक्ति, समाज और व्यवस्था का अपना-अपना धर्म यानी कर्तव्य और अनुशासन होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ संकीर्ण धार्मिकता नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य और सही आचरण से है। उनके अनुसार, राज्य धर्मनिरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई भी मानव या कोई भी सृष्टि धर्म रहित नहीं हो सकती।

पश्चिमी दुनिया के पास आध्यात्मिकता की कमी:
भागवत ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से जो आध्यात्मिक धरोहर मिली है, वह दुनिया में अद्वितीय है। यही कारण है कि भारत हमेशा से मानवता को दिशा देने वाला देश रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दुनिया के पास भौतिक ज्ञान तो है, लेकिन आध्यात्मिकता की कमी है, जबकि भारत का मार्ग आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित है। यही भारत को विश्वगुरु बनाता है। उन्होंने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा, कि चाहे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, स्वयं वह हों या आम नागरिक सभी को एक ही शक्ति संचालित कर रही है।