हाईकोर्ट के फैसले से उत्साहित शासकीय कर्मी, प्रोबेशन कर्मचारियों के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

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जबलपुर (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 2019 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में पहले तीन वर्षों तक क्रमशः 30, 20 और 10 प्रतिशत की कटौती की जा रही थी। इस निर्णय को कर्मचारी संगठनों ने अपने अधिकारों की निर्णायक जीत बताया है। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पांडेय ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश में अलग-अलग दौर की सरकारों ने कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के फैसले से 28 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी, जबकि 2019 में कमलनाथ सरकार ने नियमित कर्मचारियों के वेतन में जबरन कटौती का आदेश जारी किया। सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश जारी कर नियुक्ति के पहले वर्ष में 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया था। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को बीते छह वर्षों में करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।