भोपाल: अयोध्या बायपास पर हजारों पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। नितिन सक्सेना बनाम एनएचएआई प्रकरण में एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील की स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे कोई सुनवाई नहीं करेगा। इस दौरान 22 दिसंबर 2025 को जारी किया गया स्थगन आदेश पूरी तरह प्रभावी रहेगा। दरअसल, 10 लेन सड़क के लिए अयोध्या बायपास पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए थे। दिसंबर में महज तीन दिनों के भीतर करीब आधे पेड़ गिरा दिए गए, जिसके बाद पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। मामला एनजीटी तक पहुंचा और कटाई पर रोक लगा दी गई।अयोध्या बायपास को 10 लेन करने की परियोजना के तहत एनएचएआई द्वारा हजारों पेड़ों की कटाई की गई थी। शेष पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सक्सेना ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। अयोध्या बायपास पर पेड़ कटाई पर रोक जारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक एनजीटी ने रोकी सुनवाई
एनजीटी ने अपनाया सख्त रुख:
ट्रिब्यूनल ने एनएचएआई को दो टूक निर्देश दिए कि दो दिन के भीतर अपील वापस लेने के आधिकारिक दस्तावेज पेश किए जाएं,यदि अपील वापस नहीं ली गई है, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय तक एनजीटी कोई सुनवाई नहीं करेगा। एनजीटी ने साफ किया कि 22 दिसंबर 2025 का स्टे ऑर्डर अगली सुनवाई तक पूरी तरह लागू रहेगा बचे हुए हजारों पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। इस फैसले से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों और याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है। उनका कहना है कि यह आदेश सिर्फ अयोध्या बायपास तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पर्यावरणीय जवाबदेही तय करने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश है।अब पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। तब तक अयोध्या बायपास पर शेष पेड़ों की कटाई नहीं हो सकेगी और स्टे बना रहेगा।




