भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17वीं मौत

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इंदौर (मध्य स्वर्णिम): सोमवार को इस त्रासदी के कारण 17वीं मौत दर्ज की गई। जान गंवाने वाले 69 वर्षीय ओमप्रकाश शर्मा धार के निवासी और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी थे। वे इंदौर अपने बेटे से मिलने आए थे, जहाँ 1 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी किडनी में संक्रमण पाया गया और हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन सोमवार सुबह उनका निधन हो गया। क्षेत्र में वर्तमान स्थिति की बात करें तो अब भी अलग- अलग अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज चल रहा है। राहत की बात यह है कि नए मरीजों के मिलने की रफ्तार में कमी आई है और रविवार रात तक 20 नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की 20 से अधिक टीमें पूरे क्षेत्र में रिंग सर्वे कर रही हैं। निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए बस्ती को 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है जहाँ हर सदस्य के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। अभी तक पांच हजार से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है। इस पूरे मामले पर कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।

इंदौर के पानी में मिले ‘मौत के बैक्टीरिया’:

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सरकारी और निजी लैब में की गई सैंपलिंग की रिपोर्ट में सामने आया है कि इस पानी में हैजा और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के बैक्टीरिया मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पानी को घरेलू उपयोग और पीने के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त पाया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट लैबों के सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में पता चला है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जीवाणुओं की मौजूदगी का सीधा अर्थ यह है कि पीने के पानी की लाइन में सीवर का गंदा पानी (सीपेज) मिल रहा है। रिपोर्ट में पानी के सैंपल्स को अनसैटिस्फैक्ट्री श्रेणी में रखा गया है।