2 वर्ष की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड या फिर कुर्सी बचाने का !

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मध्य स्वर्णिम: (खबर-विश्लेषण) ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527):
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर सभी मंत्री अपने-अपने विभाग को उपलब्धियां और आने वाले तीन वर्षों की कार्ययोजना मीडिया के माध्यम से आम जनता के बीच रख रहे हैं। अब तक करीब एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों ने दो वर्ष की उपलब्धियां बता चुके है। जिन मंत्रियों के विभाग में दो वर्ष में बेहतर काम हुआ है और आम जनता के बीच में उनकी स्वीकार्यता है, उनका मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव दिल खोकर स्वागत करेंगे। लेकिन जिनके विभाग में काम कम. शिकायत ज्यादा के साथ ही धरातल पर सरकार की योजनाएं नहीं पहुंची है, उनकी कुर्सी जरूर जा सकती है। क्योंकि खरमास मास के बाद मोहन मंत्रिमंडल में फेरबदल होना भी संभावित हैं। जिसमें विवादित और गंभीर शिकायत बाले मंत्रियों की छुट्टी तय है तो वहीं जातिगत समीकरणों के आधार पर नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। जिनकी संख्या 4 से अधिक हो सकती है। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व के पास मध्यप्रदेश के प्रत्येक मंत्री का रिपोर्ट कार्ड है। जो अपने स्तर पर छानबीन कर रहा है। क्योंकि कई मंत्रियों के कारण मोहन सरकार को बिना की वजह के कटघरे में खड़ा होना पड़ा है। जिसके बचाव में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कई बार सरकार का पक्ष रखा है। इसलिए ऐसे मंत्रियों की जरूर कुर्सी जाना तय माना जा रहा है। हालही में राज्य मंत्री नगरीय प्रशासन प्रतिमा बागरी ने सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के दौरे के समय घटिया सड़क को लेकर मोहन सरकार पर उंगलियां उठा दी। बाद में मुख्यमंत्री ने मंत्री प्रतिमा बागरी को दो टूक शब्दों में कहा कि सड़क पहले ही अमानक घोषित थी तो निरीक्षण की जरूरत क्यों? मुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत देते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी कहा कि विपक्ष जैसा आचरण न करें। इसके पूर्व में राज्य मंत्री शिवाजी पटेल का मामला भी किसी से छुपा नहीं है। उस समय भी मंत्री के बेटे अभिज्ञान नरेंद्र पटेल ने भोपाल के गुलमोहर इलाके में होटल संचालक दंपती और मीडियाकर्मी से मारपीट की थी और मामला शाहपुरा थाने पहुंचा। इतना ही नहीं विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के सवाल का जवाब देते हुए रो पड़े। मिश्रा ने पुलिस के खिलाफ झूठे मामले का आरोप लगाते हुए सजा की मांग की। वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के विभाग में नर्सिंग घोटाले के मामले में तो कांग्रेस ने हल्लाबोल कर एफआईआर करने के लिए सड़क पर उतर गई थी। उस समय पूरी सरकार को बचाव के लिए सामने आना पड़ा था। इतना ही नहीं पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी इससे बहुत नाराज था। कुल मिलाकर मंत्रियों का दो साल का रिपोर्ट कार्ड ही उनके अगले तीन की गारंटी है। क्योंकि मंत्रियों को भी यह बात अच्छे से पता है कि रिपोर्ट कार्ड केवल जनता को पेश करने के लिए नहीं है, उनकी कुर्सी को बचाने का भी साधन बनेगा।