जज्बा और जुनून की दास्तां, बैतूल में विकास का रास्ता

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विश्लेषण विशेष (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
अभी से पांव के छाले न देखो। अभी यारो सफ़र की इब्तिता है।
एजाज़ रहमानी की यह पंक्तियां हेमंत खंडेलवाल पर एक दम सटीक बैठती है। क्योंकि जब नेता सशक्त हो तो विकास के रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। उनकी दूरदर्शी सोच से वे सही नीतियां बनाते हैं और प्रभावी निर्णय लेकर विकास के कई रास्ते खोल देते हैं। इसके साथ अगर उसमें जज्बा और जुनून की दास्तां जुड़ जाए तो फिर समझो विकास का पहिया पूरी रफ्तार के साथ दौड़ता है। कुछ ऐसी ही स्थिति प्रदेश के आदिवासी बैतूल जिले की है। जहां पर लगातार पिछले कुछ माह से विकास की रफ्तार चार गुनी हो गई है। क्योंकि बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल जब से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बने है तो बैतूल के। विकास का जज्बा जोर पकड़ने लगा है और लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ती जा रही है। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हेमंत खंडेलवाल के पास पहले से जुनून है। जो उन्हें उनके पिता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल से विरासत में प्राप्त हुआ है। हेमंत खंडेलवाल भी अपने पिता की तरह किसी भी काम को पूरा करने के लिए जुनून के साथ जुट जाते है। उसी का परिणाम है कि आज बैतूल और धार में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव बैतूल आ रहे है। यह हेमंत खंडेलवाल के जुनून और जज्बा का ही परिणाम है कि मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखने का मुख्य कार्यक्रम जेपी नड्डा और डॉक्टर मोहन यादव की उपस्थिति में बैतूल में हो रहा है। बैतूल जैसे आदिवासी जिले में मेडिकल कॉलेज आने से लोगों को किफायती दरों पर इलाज की सुविधा मिलेगी और जिले में कोई भी नई गंभीर बीमारी पर रिसर्च हो सकेगा। जानकारी के अनुसार बैतूल और धार में मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार ने प्रत्येक कॉलेज के लिए 25 एकड़ भूमि मात्र 1 रुपये की दर पर आवंटित की है। दरअसल अप्रैल की शुरुआत में सरकार ने निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराने की नई नीति की घोषणा की थी, जिसे मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद जिला अस्पतालों को पीपीपी मॉडल से बनने वाले मेडिकल कॉलेजों से जोड़ने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं। बैतूल में विकास का पहिया अभी यहां थमा नहीं है। क्योंकि हेमंत खंडेलवाल ने खेल अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाते हुए जिले में करीब 5 करोड़ रूपए की लागत से राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। जिसकी मुख्यमंत्री विशेष निधि से मंजूरी मिल गई है और इसके लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं। यह स्टेडियम उत्कृष्ट विद्यालय बैतूल की भूमि पर, बनेगा। साथ ही एथलेटिक ट्रैक पुलिस परेड ग्राउंड बैतूल में लगभग 40 लाख रुपए की लागत से बनाया जाएगा। इसके पीछे भी हेमंत खंडेलवाल का विजन क्लियर है, वे जिले के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना चाहते है, ताकि उन्हें महानगरों जैसी सुविधाएं मिल सकें और वे राष्ट्रीय फलक पर बैतूल जिले का नाम रोशन कर सके। कुल मिलाकर हेमंत खंडेलवाल के जज्बा और जुनून से बैतूल जिले के विकास का पहिया अब राष्ट्रीय स्तर पर नजर आएगा, इसलिए…
अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फैसला। जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा ।।