जनता के लिए भय नहीं,भरोसे का प्रतीक बने : डॉ. यादव

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुलिस के प्रति जनसामान्य की धारणा बदलना और पुलिस-जनता संवाद को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने निर्देश दिए कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपने-अपने प्रभार क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण जैसी गतिविधियां तत्काल प्रारंभ करें और पुलिस अपनी उपलब्धियों व सकारात्मक कार्यों की जानकारी भी जनता से साझा करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुलिस मुख्यालय में आयोजित पुलिस महानिदेशक- महानिरीक्षक सम्मेलन 2025 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की धरती से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए पुलिस फोर्स को बधाई देते हुए इस संघर्ष में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में इस तरह विकास और जनकल्याण की गतिविधियां संचालित की जाएं, ताकि नक्सलवाद दोबारा पनप न सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 दिसंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में भी पुलिस फोर्स की सराहना की गई है। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के साथ हुई। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव गृह शिवशेखर शुक्ला सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया आज एक शक्तिशाली माध्यम होने के साथ गंभीर चुनौती भी बन चुका है। अफवाहों, भ्रम और अपराध को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर सतत निगरानी और त्वरित, प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं, ऐसे में पुलिस बल का तकनीकी रूप से दक्ष और संसाधन-संपन्न होना अनिवार्य है, ताकि पीड़ित को तुरंत सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने पुलिस की छवि को लेकर कहा कि पुलिस अपराधियों में भय और आमजन में भरोसा पैदा करे। लोग पुलिस को डर की नहीं, मदद की नजर से देखें। इसके लिए सामुदायिक पुलिसिंग गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा, खासकर महिला और बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज में सकारात्मक वातावरण बनाना जरूरी है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी भाषा और व्यवहार के प्रति संवेदनशील रहने की सलाह दी तथा नवाचार और सामाजिक सरोकार से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। सड़क सुरक्षा पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जागरूकता और तकनीक दोनों पर काम करना होगा।

फोरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी:
मध्यप्रदेश पुलिस को कुल 57 मोबाईल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी लागत 36 करोड़ 94 लाख 17 हजार 969 रुपए है। राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदाय की गई है। इनमें से 14 मोबाईल फॉरेंसिक वैन 16 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई है, जिन्हें रवाना किया गया है। शेष मोबाईल फॉरेसिंक वैन भी शीघ्र ही जिलों को उपलब्ध कराई जाएंगी। मोबाईल फॉरेंसिक वैन अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं, जिनमें स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फिज, एलईडी टीवी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा सहित आवश्यक उपकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वैनों में जांच किट, अपराध स्थल सुरक्षा किट, फिंगर प्रिंट, रक्त व बाल पहचान, हाई-इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स, पैर व टायर निशान, आगजनी, साक्ष्य पैकिंग, बुलेट होल, गनशॉट अवशेष, नशीले पदार्थ, विस्फोटक पहचान तथा डीएनए कलेक्शन एवं चेन ऑफ कस्टडी से संबंधित किट भी उपलब्ध हैं।