‘नितिन’और ‘हेमंत’ ने सिद्ध किया ‘असंभव कुछ भी नहीं’, एक्सीडेंटल नेता लेकिन क्रेडिबल संगठक

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विश्लेषण विशेष (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
कहते है राजनीति में किस्मत का साथ होना बहुत जरुरी होता है। जिसका मुकद्दर साथ दे दे सिकंदर वही बन जाता है। यह बात बिल्कुल सटिक बैठी है, विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के हाल के दो निर्णयों में। हालांकि सिकंदर बनाने में पार्टी का भी बहुत बड़ा योगदान था, जिसमें कार्यकर्ताओं में यह संदेश भेजने में सफलता प्राप्त कर ली कि इस दल में असंभव कुछ नहीं. बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर सकता है. जो देश की किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में संभव ही नहीं है। लिहाजा अभिनंदन तो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्वों और उनके संगठकों को किया जाना चाहिए, जो कंकर में भी शंकर तलाश लेते है। नव मनोनीत कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की राजनीतिक यात्रा भी किसी उपन्यास कथानक के भांति ही है। जहां राजनीति में न आने की इच्छा के बावजूद पार्टी ने वो सब दे दिया जो हर एक नेता की चाहत होती हैं। दरअसल नितिन नबीन और हेमंत खंडेलवाल का एक्सीडेंटल पॉलिटिशियन कहा जाए तो गुरेज नहीं होना चाहिए, लेकिन अब यही एक्सीडेंटल नेता कुशल संगठक बनकर सामने आ चुके है। आज हम सबसे पहले बात करते है कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की, जो अपने पिता नबीन किशोर सिन्हा की मृत्यु (31 दिसंबर 2005) के बाद साल 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने थे। यहां से ही उनकी राजनीतिक यात्रा प्रारंभ हुई थी। जो साल 2010 से 2025 तक लगातार बांकीपुर सीट पर जीत के साथ जारी है। नितिन नबीन साल 2016 से 2019 तक बीजेपी युवा मोर्चा के बिहार राज्य के अध्यक्ष थे। बाद में वह भाजयुमो के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। उन्हें पहली बार नीतीश कुमार की सरकार में साल 2021 में मंत्री बनाया गया था। जानकारी के अनुसार नितिन नबीन कायस्थ समुदाय के एक भारतीय राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में लगभग 84000 वोटों से जीत हासिल की। पिछले चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को भारी अंतर से हराया था। जिसके बाद से वे केंद्रीय नेतृत्व की आंख का तारा बन गए थे। जिसका उन्हें रिटर्न गिफ्ट भाजपा के सर्वोच्च पद के रूप में मिला है। ठीक इसी तरह मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत विजय खंडेलवाल की राजनीतिक यात्रा उनके पिता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल को मृत्यु (12 नवंबर 2007) के बाद 2008 में हुए बैतूल-हरदा लोकसभा उपचुनाव में सांसद निर्वाचित होने के बाद शुरू हुई। उस समय जरूर हेमंत खंडेलवाल चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जबरदस्ती उन्हें टिकट दिया और वे विजयी रहे। बस यहां से ही हेमंत खंडेलवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और वे 2010-2013 तक भाजपा जिलाध्यक्ष बैतूल रहे, वर्ष 2013- 2018 तक बैतूल विधायक, वर्ष 2014-2018 तक मध्यप्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष, वर्ष 2019 संगठन चुनाव के प्रदेश चुनाव अधिकारी, वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रवासी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी दी, वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 15 जिलों के 61 विधानसभा क्षेत्र में प्रवासी कार्यकर्ता के प्रभारी का दायित्वों का निर्वहन किया, वर्ष 2023 में बैतूल विधायक, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव प्रदेश संयोजक के दायित्वों का निर्वहन किया, कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी समारोह के सचिव रहे, वर्तमान में कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष के साथ ही पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक दायित्व के रूप में 2 जुलाई 2025 को प्रदेश अध्यक्ष भाजपा बनाया था। कुल मिलाकर ‘नितिन नबीन’ और ‘हेमंत खंडेलवाल’ की राजनीतिक यात्रा एक जैसी रही हैं, जिन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि ‘असंभव कुछ भी नहीं…।