बीजेपी में हेमंत बयार, संगठन में समन्वय से सहकार

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विश्लेषण विशेष: ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने आज से ठीक 94 दिन पहले मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में हेमंत खंडेलवाल का चयन करके सभी को चौंका दिया था, उस समय अध्यक्ष की दौड़ में शामिल कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना था कि विष्णु दत्त शर्मा के पांच वर्ष से अधिक लंबे कार्यकाल के बाद हेमंत/ खंडेलवाल पार्टी, संगठन और सरकार में समन्वय बनाकर कैसे आगे बढ़ पाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और हेमंत के बीच में पटरी बैठ पाएगी या फिर पूर्व अध्यक्ष की तरह दोनों में खटपट बनी रहेगी। इस तरह के तमाम कयासों को महज 94 दिनों में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी सूझबूझ से सबसे पहले अल्प समय में सभी को साधते हुए संतुलित प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया। जिसकी पूरे प्रदेश में स्वीकारता रही और कार्यकर्ताओं ने दिल खोलकर हेमंत कार्यकारिणी का स्वागत किया। यह सिलसिला यहां थमा नही बल्कि जिन लोगों को प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिला उन्हें संभाग प्रभारी बनाकर नई जिम्मेदारी देकर काम से लगाने का काम किया। इसके बाद मोर्चा और प्रकोष्ठों के प्रदेश प्रभारी बनाकर घर बैठे भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों को ‘फ्रंट लाइन’ में लाकर इतिहास रचने का काम किया। जिसकी प्रदेश के लाखों कार्यकर्ता भूरी-भूरी प्रशंसा करते थक नहीं रहे है। इतना ही नहीं प्रदेश भाजपा कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार दो मंत्री बैठकर कार्यकर्ताओं से मिलने की व्यवस्था प्रारंभ करके हेमंत ने लाखों कार्यकर्ताओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। क्योंकि यह व्यवस्था को लागू करने के लिए पिछले 10 सालों से पार्टी विचार कर रही थी, लेकिन प्रारंभ नहीं हो पाई थी। परन्तु प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को विश्वास में लेकर व्यवस्था को शुरू करा दिया है। अब वे जल्दी पौष का महीना (5 दिसंबर) लगने से पहले निगम-मंडल में नियुक्ति करके अपने हिस्से की सभी प्रारंभिक जवाबदारियां से फ्री हो जायेंगे। वैसे भी मोहन-हेमंत जोड़ी की चर्चाएं पूरे प्रदेश में जोरों पर है। जो नए नए इतिहास लिखने के लिए बेहद आतुर है। सबसे खास बात यह है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के प्रत्येक निर्णयों पर आरएसएस की मुहर होती है, इसलिए अभी बीजेपी में हेमंत बयार, संगठन में समन्वय से सहकार की हवा चल पड़ी है। जो ‘न भूतो न भविष्यति’ होगा।