जबलपुर: छह लाख रुपये की कथित साइबर ठगी के मामले में पुलिस-प्रशासन की सुस्त कार्रवाई पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की जांच में हो रही देरी पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों, संबंधित राज्यों के गृह सचिवों, केंद्र सरकार के गृह सचिव, दूरसंचार विभाग के केंद्रीय सचिव, जबलपुर पुलिस अधीक्षक तथा मामले से जुड़े जांच अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच में देरी से न केवल विवेचना प्रभावित होती है, बल्कि आरोपियों को ठगी की रकम ठिकाने लगाने का भी मौका मिल जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक को यह बताना चाहिए कि साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान बैंकों द्वारा समय पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से नियामकीय सुरक्षा उपाय लागू हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन इस मामले ने गंभीर संस्थागत कमियों को उजागर किया है। विभिन्न राज्यों की पुलिस, जांच एजेंसियों और बैंकिंग संस्थानों के बीच, साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच समन्वय की चिंताजनक कमी दिखाई देती है।




