नई दिल्ली: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को अदालती प्रक्रिया से बाहर आपसी बातचीत से सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की पहल को झटका लगा है। मामले से जुड़े हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने शीर्ष अदालत के मध्यस्थता प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। दोनों पक्षों ने साफ किया है कि वे इस संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान केवल और केवल कानूनी प्रक्रिया और अदालती फैसले के द्वारा चाहते हैं। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों से मंगलवार को वाराणसी कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होकर सुलह की संभावनाएं तलाशने को कहा था। यह पहल समाधान समारोह का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य 21 से 23 अगस्त तक होने वाली विशेष लोक अदालत से पहले मध्यस्थता के माध्यम से लंबित मामलों को आपसी सहमति से निपटाने को बढ़ावा देना था। इस पहल के तहत, कई लंबित मामलों के पक्षों से आपसी सहमति से समझौता करने की संभावना तलाशने को कहा गया था। हिंदू पक्ष ने मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने से साफ इंकार किया है और कानूनी कार्यवाही के आधार पर ही निर्णय की मांग की है। उनके अनुसार, मुद्दे का फैसला अदालतों को कानून के मुताबिक करना चाहिए। हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने कहा, हिंदु पक्ष ने तय किया है कि मंदिर हमारा है और मुस्लिम पक्ष कब्ज़ा करने वाला है। मूल ज्योतिर्लिंग स्थल पर भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण होना चाहिए।वहीं, मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता प्रक्रिया पर आपत्ति जताकर इसमें शामिल न होने का फैसला किया है।




