आभास-प्रभाष

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पत्रकारिता के कुल गुरु आंचलिक पत्रकारिता की शब्दावली को गड़ने वाले दैनिक मध्य स्वर्णिम के आराध्य और हमारे ही परिवार के प्रणेता परम श्रद्धेय प्रभाष जोशी जी की आज जन्म जयंती है। मध्य स्वर्णिम को आशीर्वाद के स्वरूप प्रभाष जी ने पत्रकारिता के जो सूत्र वाक्य दिए थे हमे आत्मिक संतोष है कि उनके बताए हुए गुणों पर चलते हुए उनकी जन्म जयंती के ठीक एक दिन पहले 13 वर्षों का सफर पूर्ण कर 14 वें सौपान में प्रवेश किया। मामा जी सैद्धांतिक थे, सिध्दांतों पर अडिग थे। हमने भी वहीं मार्ग चुना, कष्ट आए। लेकिन भरोसा है 14 वर्षों के वनवास के बाद श्रीराम जी का भी राज्य अभिषेक हुआ । ना अभिनंदन, ना क्रंदन, राष्ट्र के निर्माण में मूल के साथ त्रणवीर बने कोशिश इसी बात की। चूंकि, आप प्रभास है इसलिए हम जैसे टिपासुओं के आभाष है।

विनयावत
दैनिक मध्य स्वर्णिम परिवार