नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले 19 जुलाई को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। संसद के प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित होने वाली इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्षी दल उन मुद्दों को सामने रखेंगे जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का विधायी एजेंडा इस बार काफी व्यापक है और सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, हाल के हफ्तों में कुछ विपक्षी दलों में सामने आए मतभेद और विभाजन के कारण सत्र के हंगामेदार रहने के भी आसार हैं।
बंगाल चुनावों के बाद हो रहा है सत्र:
विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल देखने को मिली है। पार्टी के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है। इसके अलावा, पार्टी के तीन सांसदों ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है।
विपक्ष इन मुद्दों को उठाएगा संसद में:
शिवसेना (यूबीटी) में भी विभाजन हुआ है। लोकसभा में पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। वहीं, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सात सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से हृश्वश्वञ्ज-त्र पेपर लीक का मामला और ऑपरेशन सिंदूर में हुई हताहतों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणियों का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस ने इस संबंध में रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों का मॉनसून सत्र 20 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक बुलाने को मंजूरी दी है।




