भोपाल (मध्य स्वर्णिम): दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को तगड़ा झटका लगा है। भाजपा ने सारी संभावनाओं को दरकिनार करते हुए उपचुनाव में आशुतोष तिवारी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है।गौरतलब है कि वर्ष 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के राजेंद्र भारती विजयी हुए थे। लेकिन बैंक एफडी फ्रॉड के एक मामले में दिल्ली की विशेष एमपी- एमएलए कोर्ट ने भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई थी । भारती ने इसे हाईकोर्ट दिल्ली में चुनौती भी दी थी। उनकी अपील भी खारिज कर दी गई। इसके बाद अब उपचुनाव का रास्ता साफ़ हो गया है। कांग्रेस ने अभी दतिया सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
नरोत्तम के समर्थन में बगावत:
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही पार्टी में बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया भाजपा में खुली बगावत सामने आई। विरोध स्वरूप भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत जिला इकाई के कई पदाधिकारियों ,पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए, जबकि बड़ी संख्या में समर्थक सड़क पर उतर आए। कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय के मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने फैसले को दतिया की उपेक्षा बताते हुए विरोध दर्ज कराया। दतिया में कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव कराया जा रहा है।
पार्टी को एकजुट रखना चुनौती:
भाजपा ने नया चेहरा उतारकर स्थानीय स्तर पर एक नया संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती चुनावी रणनीति और संगठनात्मक नेटवर्क को कम समय में सक्रिय करना होगी। दतिया में भाजपा लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मजबूत जनाधार और उनके समानांतर संगठनात्मक नेटवर्क के सहारे चुनाव लड़ती रही है। नरोत्तम की व्यक्तिगत पकड़ बूथ स्तर तक मानी जाती थी। ऐसे में नए उम्मीदवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस नेटवर्क को कम समय में प्रभावी ढंग से सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना होगी। यदि भाजपा संगठन और संघ का मजबूत सहयोग नए उम्मीदवार को मिला, तो चुनावी मुकाबले में पार्टी को बढ़त मिल सकती है। वहीं कांग्रेस भी इस उपचुनाव को पूरी ताकत से लडऩे की तैयारी में है।अब मुकाबला सीधे बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार के बीच माना जा रहा है। नरोत्तम मिश्रा के न होने से कांग्रेस को यह मौका लग रहा है कि वह परिवर्तन के मुद्दे को भुना सके। वहीं भाजपा विकास और संगठन के नाम पर वोट मांगने की तैयारी में है।




