कांग्रेस की अंदरूनी कलह के बोझ से दरकता दतिया

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है। दतिया सीट का उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे नरोत्तम मिश्रा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था । वर्ष 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 7,500 से अधिक मतों के अंतर से हरा कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था । अब उपचुनाव में भाजपा इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की रणनीति बना रही है, जबकि कांग्रेस अपनी जीत बरकरार रखने की चुनौती से जूझ रही है । दतिया में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ अब उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा शुरु हो गई है। बीजेपी की ओर से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम दावेदारों में है । वहीं कांग्रेस की तरफ से कई नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे है। कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान – दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसके भीतर ही दिखाई दे रही है। पार्टी में टिकट के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, जिससे आंतरिक खींचतान बढ़ गई है । कांग्रेस की ओर से टिकट के दावेदारों में पहला नाम 2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से कांग्रेस में अवधेश नायक का है और वह टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं । भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें टिकट दिया था, लेकिन दतिया से लेकर भोपाल तक राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया । ऐसे में यदि इस बार अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता | राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या टिकट को लेकर बढ़ता असंतोष है। यदि पार्टी किसी एक दावेदार को टिकट देती है तो दूसरे खेमे के असंतुष्ट होने की आशंका बनी रहेगी। विशेष रूप से यदि अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो राजेंद्र भारती का पूरा समर्थन मिलना आसान नहीं माना जा रहा । राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ऐसी स्थिति में अनुज भारती किसी अन्य दल या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में विभाजन हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है ।

सतत संपर्क कर रहे नरोत्तम:
राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद से नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से पुन: संपर्क साधने के लिए सामाजिक सम्मेलन और सामुदायिक सभाएं आयोजित करके अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। उन्होंने पिछले दो महीनों में एक दर्जन से ज्यादा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा दतिया के लिए एक बड़ी सरकारी घोषणा की तैयारी कर रही है। खबरों के मुताबिक, मिश्रा ने विकास योजनाओं पर चर्चा करने के लिए 1 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। पार्टी का कहना है कि उन्होंने 2023 के चुनाव में हुई गलतियों से सबक लिया है। इसके अलावा 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जो एंटी-इंकम्बेंसी का माहौल था, वह अब पहले जैसा नहीं माना जा रहा। क्षेत्र में विकास और सरकारी योजनाओं को लेकर भाजपा नए सिरे से माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता में होने के कारण प्रशासनिक और संगठनात्मक मजबूती भी भाजपा के पक्ष में महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।