नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): भारत में नकली और घटिया दवाओं की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई बार मरीजों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि जो दवा वे खरीद रहे हैं, वह असली है या नकली । इसी समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने दवाओं की ट्रैकिंग और सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए क्यूआर कोड लगाने का फैसला किया है । इसके साथ ही आयात होने वाली दवाओं के शेल्फ लाइफ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है । स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर अनुसूची एच2 के दायरे का विस्तार किया है। अब केवल चुनिंदा दवाओं तक सीमित रहने के बजाय इन श्रेणियों की सभी दवाएं अनुसूची एच 2 के तहत आएंगी। क्यूआर कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था पहली बार 1 अगस्त 2023 से लागू की गई थी। उस समय यह नियम केवल देश के 300 सबसे अधिक बिकने वाले दवा ब्रांडों पर लागू किया गया था । इनमें डोलो, कैलपोल, कॉम्बीफ्लैम, सैरिडॉन, ऑगमेंटिन, एजिथ्राल, एलेग्रा और थायरोनॉर्म जैसी लोकप्रिय दवाएं शामिल थीं । इन दवाओं पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके उपभोक्ता दवा की असलियत और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी की जांच कर सकते थे । सरकार ने उद्योग को नए नियम लागू करने की तैयारी के लिए चरणबद्ध समय-सीमा तय की है।




