भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मेरी प्राथमिकताएं सबसे पहले लोगों की समस्याओं को सुनने की होती है, यदि आपने पहले समस्या को ध्यान से सुन लिया तो उसके समाधान के रास्ते अपने आप निकल जाते हैं। इसलिए कोशिश होती है कि जितने भी लोग आ रहे हैं, उनकी समस्याओं को सुनकर उसके अनुरूप दिशा निर्देश देने पर समाधान हो ही जाता है। इसके बाद जब व्यक्ति दूसरी बार धन्यवाद ज्ञापित करने आता है तो एक आत्मसंतोष मिलता है। उक्त आशय के विचार प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दैनिक मध्य स्वर्णिम से एक अनौपचारिक चर्चा में कहीं। राव उदय प्रताप सिंह प्रदेश के उन गिने चुने मंत्रियों में शामिल हैं, जो अपने निवास या मंत्रालय में आने वाले हर व्यक्ति से मिलकर उनकी समस्या सुनते भी हैं और निदान भी करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों मंत्री बंगले पर अपेक्षाओं का सैलाब उमड़ रहा है। दरअसल, राव उदय प्रताप सिंह के पास प्रदेश के दो सबसे महत्वपूर्ण विभाग स्कूल शिक्षा और परिवहन की जिम्मेदारी है। पिछले लगभग ढाई साल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में दोनों ही विभाग लगातार नवाचार कर रहे हैं। इसके सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इस साल हाई स्कूल और हायर सेकण्डरी का परीक्षा परिणाम निजी स्कूलों को पीछे छोड़ने वाला रहा है। अधिकतर टॉपर छात्र-छात्राएं शासकीय स्कूलों से ही थे। परिवहन विभाग में भी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और ब्लैक स्पॉट को चिन्हित करने का काम तेजी से चल रहा है। ट्रक और बस ऑपरेटर प्रदेश के विकास में किस तरह सहभागी बन सकते हैं ? इसकी लगातार चिंता मंत्री उदय प्रताप कर रहे हैं। इसी गंभीरता और सहजता का परिणाम है कि प्रदेश के कोने कोने से लोग अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लगाए पहुंचते हैं। दैनिक मध्य स्वर्णिम का प्रतिनिधि जब पहुंचा तो लगभग ढाई सौ लोग आवेदनों और शिकायतों के साथ निवास कार्यालय में उपस्थित थे। सांसद, विधायक, पार्टी पदाधिकारी से लेकर आम लोगों के बीच कोई भेद नहीं किया जाता है। सभी को बराबरी से अपनी बात मंत्री तक पहुंचाने की आजादी भी हैं निवास कार्यालय में बे रोक टोक आने जाने की स्वतंत्रता भी है । राव उदय प्रताप सिंह का कहना है कि 2047 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में मप्र का योगदान अहम होगा, उसी दिशा में दी गई जिम्मेदारियों का निर्वाहन करने का संतोष है।
कार्यकर्ताओं का मान बढ़ा:
जनसंघ के जमाने से पार्टी के लिए समर्पित और हरदा से 1977 में विधायक रहे बाबूलाल सिलपुरिया (नजीरजी) भी मंत्री राव उदय प्रताप से मिलने पहुंचे थे। बंगले पर की जा रही आवभगत से सिलपुरिया जी अत्यंत ही प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि 40 सालों की तपस्या का ऐसा परिणाम देखने के बाद आत्मा गदगद हो गई। आम जनता और कार्यकर्ताओं का ऐसा सम्मान मिलना संस्कार की ही बात है।




