मोहन सरकार… विकास की मुकम्मल रफ्तार

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विशेष संपादकीय (मध्य स्वर्णिम): राकेश व्यास (मो.9977701999)
वैसे तो प्रदेश अब देश में पिछड़ा नहीं कहलाता क्योकि आर्थिक विकास और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के मामले में मध्य प्रदेश का 10वां स्थान है। राज्य का अनुमानित GSDP लगभग 15 लाख करोड़ से अधिक है। हालांकि, प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से राज्य 26वें स्थान पर है । सन 2003 से पहले अविभाजित और नवनिर्मित मध्य प्रदेश आर्थिक विकास (GSDP) की दृष्टि से देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था और यह बड़े राज्यों की तुलना में निचले पायदानों (लगभग 20वें से 26वें स्थान ) पर था । मतलब साफहै प्रदेश धीरे धीरे विकास के रूम में ऊपर आ रहा है। वर्ष 2002-03 तक राज्य की आर्थिक विकास दर लगभग 4.43 प्रतिशत के आसपास थी । सन् 2000 में मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग हो जाने के कारण अधिकांश खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्र नए राज्य में चले गए थे, जिससे विकास की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी। उस समय राज्य की अर्थव्यवस्था मूल रूप से कृषि पर निर्भर थी और सिंचाई का प्रतिशत व औद्योगिक विकास बहुत कम थ। अब जब से मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है तब से आज तक कई ऐसे काम हुए जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पहले लोगो को विजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाता रहा हैं उस समय बाकई ऐसा लगता था मानो अभी देश तो आज़ाद हो गया लेकिन प्रदेश आजाद हो नहीं पाया है। आज न केवल विजली, पानी की समस्या से निदान मिला बल्कि वो हर छोटी से छोटी समस्या ख़त्म हो गई । जब 2023 में मुख्यमंत्री बदले गए तो लोगो को ऐसा लगा नए मुख्यमंत्री के आने ने बाद काम की गति धीमी हो जाएगी लेकिन ऐसा होने की जगह काम में और तेजी आई। प्रदेश की जनता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्य से प्रभावित है और अब जनता मान बैठी की डॉ मोहन यादव अपने काम को सुचारु रूप से चलाने में सक्षम है। अब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 500 करोड से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन /लोकार्पण हो चूका है मुख्यमंत्री ने सबसे पहले रजिस्ट्री से जुड़े मुद्दों को हल किया मुख्यमंत्री ने साइबर तहसील को पूरे प्रदेश में लागू करने की व्यवस्था शुरू की। इसके तहत किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही अपने आप नामांतरण की सुविधा को शुरू किया गया। प्रदेश में सुशासन की दिशा में यह बड़ा कदम माना गया। दूसरा बड़ा काम डॉ. मोहन यादव ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी दिलाई। यह दुनिया की सबसे बड़ी नदी जोड़ा परियोजना है। फिर गरीब मजदूरों के लिए इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजूदरों का हक कई वर्षों से मारा जा रहा था । पूर्ववर्ती सरकारों ने इस पर फैसला नहीं लिया, लेकिन डॉ. मोहन यादव ने इसे हल करके हुकुमचंद मिल के 4 हजार 800 मजदूरों को उनका हक दिलाया है। फिर मध्य प्रदेश के छोटे-छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए पीएम श्री वायुसेवा शुरू की गई है। इस विमान में बहुत कम किराए में लोग भोपाल, जबलपुर, इंदौर, सिंगरौली, रीवा जैसे शहर में आवागमन कर सकते हैं। उसके बाद डॉ. मोहन यादव ने एयर एंबुलेंस की सौगात प्रदेश को दी है। गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को एयर एंबुलेंस के द्वारा देश के किसी भी अन्य अस्पताल में भेजा जा सकता है। आयुष्मान कार्ड धारियों के लिए यह सेवा निःशुल्क है। प्रदेश में कानून व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून- व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस विभाग में 10,000 कांस्टेबल्स और 500 सब-इंस्पेक्टरों की नई भर्तियों की घोषणा की है । किसानो के हित के लिए राज्य सरकार द्वारा 2026 को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके। उड़द, सरसों, चना, मसूर और तिवड़ा उगाने वाले किसानों को बोनस देने का निर्णय लिया गया है। गर्मी के मौसम में उड़द उगाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त 2600 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बड़े पैमाने पर प्रमोशन की सुविधा और उनके मुद्दों के लिए कर्मचारी आयोग के गठन का ऐलान किया गया है। प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बड़े पैमाने पर प्रमोशन की सुविधा और उनके मुद्दों के लिए कर्मचारी आयोग के गठन का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री ईश्वर पर भी गहरी आस्था रखते है। उज्जैन के रहने वाले मुख्यमंत्री ने सबसे पहले उज्जैन की रुपरेखा बदली आज उज्जैन महकाल की नगरी में आने वाले लाखो श्रद्धालु मुख्यमंत्री द्वारा कराये गए ऐतिहासिक कार्य की सरहाना करते है। सब का मानना है अब उज्जैन जैसी जगह पर मूलभूत सारी सुबिधा उपलब्ध रहती है। एक मिथ ये भी डॉ मोहन यादव ने तोड़ा था की उज्जैन में अगर कोई मुख्यमंत्री रुकता है तो उनकी कुर्सी चली जाती है । जिसे कई बार मंचो से डॉ मोहन यादव ने कहा की में महकाल का भक्त हूँ उनके द्वारा पद मिला अगर जायगी तो भी मुझे अफ़सोस नहीं देने देने वाले वो है। अभी हाल ही में जब धार भोजशाला का निर्णय हिन्दुओ के पक्ष में आया तब मुख्यमंत्री ने ये घोषणा की की इस क्षेत्र (धार) को भी अग्रणी जिला बनाएंगे और भोजशाला में माँ बाग्यदेवी को पुनः स्थापित कर भव्य रूप प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री न सिर्फ घोषणा करते है बल्कि उस घोषणा पर अमल हुआ की नहीं उसकी जानकारी भी अपने अधिकारीयों से लेते रहते है। अभी वैसे मुख्यमंत्री के पास सबसे बड़ी चुनौती 2028 है जब उज्जैन में सिंहस्थ लगने वाला है अनुमान है करीब 40-50 करोड़ लोग आ सकते है जैसे प्रयागराज में हुआ था वहां करीब 66 करोड़ लोगो ने आस्था की डुबकी लगाई थी। मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र होने के साथ साथ उनका प्रदेश का मुख्यमंत्री होना भी है इस नाते उनकी चुनौती बड़ी है वैसे जिस गति और सहस से वो काम कर रहे उनके लिए शायद ये बड़ी चुनौती न हो ।