भोजशाला में पूजन करने वाले पहले सीएम बने डॉ.मोहन

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धार (मध्य स्वर्णिम): भोजशाला मंदिर परिसर में गंगादशमी के दिन वो धार्मिक अनुष्ठान हुआ जो कई शताब्दियों तक नहीं हुआ था। यहां पहली बार भोजशाला में मां वाग्देवी का पूरे विधि- विधान से पूजन हुआ। पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने यहां पूजा- अर्चना की । यह पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री सीएम मोहन यादव ने की। इस बात से गदगद होकर उन्होंने धारवासियों को न केवल बधाई दी, बल्कि यहां तक कह दिया कि अब धार में वो सब होगा, जो वो चाहेंगे। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि धार में मां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थानों की स्थापना की जाएगी ।मोहन यादव ने भोजशाला परिसर में प्रवेश करते ही मां वाग्देवी का ध्यान किया । उसके बाद उन्होंने विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना की । उसके बाद उन्होंने मां की आरती की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज गंगा दशमी का पावन दिन है । धार राजा भोज की नगरी है । राजा भोज – सम्राट । विक्रमादित्य और हर्षवर्धन, तीनों मालवा के ऐसे लाल हैं, जिनकी वजह से सनातन संस्कृति ने दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई है । उन्होंने कहा कि राजा भोज ने खुद कई किताबें लिखीं और पुरातन महत्व की इमारत बनवाईं। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अगर किसी ने बनवाया, तो राजा भोज ने बनवाया। राजा भोज ने नदी की मुख्य धारा को बंद करने के बजाए, भोपाल तालाब बनाया। उनकी तकनीक पर अच्छे से अच्छे विद्वान दांतों तले अंगुलि दबाते हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने कवि सम्मेलन कराया और कवियों को एक-एक सोने की ईंट का अवॉर्ड दिया। यह है हमारा गौरवशाली अतीत | मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरासत से विकास की बात की ।

पांच-पांच लाख रुपए की मदद:
मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला आंदोलन में अपने प्राणों की आहूति देने वाले स्वर्गीय पंत सिंह, स्वर्गीय अंतर सिंह और स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह के परिजन को सम्मानित किया। तीनों के परिवार को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की। तीनों बलिदानियों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया। गौरतलब है कि भोजशाला को लेकर 701 सालों से विवाद चल रहा था। हिंदुओं को मंगलवार को पूजा की अनुमति थी। शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर पर सिर्फ हिंदुओं को अधिकार है। अब कमाल मौला मस्जिद में मुस्लिमों को नमाज पढऩे की अनुमति नहीं है। इस बार जुमे पर मुस्लिमों को नमाज पढऩे की अनुमति नहीं दी गई। अब हिंदू समाज के लोग वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से मांगने की मांग कर रहे हैं।