भोजशाला में नमाज पर रोक, अब सिर्फ पूजा होगी

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इंदौर (मध्य स्वर्णिम): धार भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है । मस्जिद पक्ष को अलग जमीन दी जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार से याचिका करे |मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करते हुए इसे मंदिर माना है। मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए |मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला।

➤ सुप्रीम कोर्ट जाएगा मस्जिद पक्ष:
धार भोजशाला में अब नमाज पर रोक लग गई है, अब सिर्फ यहां पूजा होगी। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ ही अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पक्ष रखा था। मंदिर पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे। अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।

➤ क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले को लेकर पिछले चार साल से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर करार दिया है। इस फैसले के बाद से हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है।

➤ विवाद में वाग्देवी प्रतिमा भी बड़ा मुद्दा:
विवाद में मां वाग्देवी की प्रतिमा का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। रिकार्ड के अनुसार 1875 में खुदाई के दौरान प्रतिमा मिलने का उल्लेख है। बाद में ब्रिटिश अधिकारी इसे इंग्लैंड ले गए। हिंदू संगठनों ने कई बार प्रतिमा को वापस भारत लाने की मांग उठाई। अब हाई कोर्ट ने भी कह दिया है कि सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे।

➤ स्तंभों की ‘मौन गवाही’ सबसे बड़ा सबूत:
धार की भोजशाला को हिन्दू मंदिर मानते हुए इंदौर हाईकोर्ट के अहम फैसले में एएसआई की रिपोर्ट सबसे अहम रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को आधार मानकर ही कोर्ट ने भोजशाला विवाद को मंदिर करार दिया है। बता दें कि फैसले में अहम कड़ी बनकर सामने आई रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के वो 188 मूल आधार स्तंभ जिनमें 106 मुख्य स्तंभ और 82 अर्धस्तंभों फैसले का मुख्य आधार बने, जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक, देवी-देवताओं की आकृतियां और मंदिर शैली की नक्काशी मिलने का दावा किया गया। इन्हीं तथ्यों को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया।मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में ्रस्ढ्ढ की 2024 सर्वे रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट के अनुसार परिसर में कुल 106 मुख्य स्तंभ और 82
अर्धस्तंभ मौजूद हैं। इनमें से कई स्तंभों पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक चिन्ह, देवी-देवताओं की आकृतियां और पारंपरिक मंदिर शैली की नक्काशी पाई गई।

➤ सुप्रीम कोर्ट में दायर कैविएट:
धार स्थित भोजशाला परिसर विवाद मामले में हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की। याचिका में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर होने वाली किसी भी अपील पर हिंदू पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। यह कैविएट जितेंद्र सिंह ‘विशेन’ की ओर से अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से दाखिल की गई। याचिका में कहा गया है कि उपरोक्त मामले में हस्ताक्षरकर्ता को नोटिस दिए बिना कोई आदेश पारित न किया जाए।जितेंद्र सिंह विशेन इस मामले में छठे याचिकाकर्ता थे, जिस पर इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।

सांस्कृतिक विरासत और आस्था का सम्मान:
सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय को देश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का एक बेहद महत्वपूर्ण क्षण बताया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब भोजशाला को एक संरक्षित स्मारक और मां वाग्देवी की पवित्र आराधना स्थली के रूप में और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास की बात कही है।सीएम डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण और प्रबंधन में आने के बाद भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही वहां श्रद्धालुओं के पूजा-अर्चना के अधिकार को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाएगा।