गलती सिस्टम की, भुगत रहे बच्चे

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विशेष संपादकीय (मध्य स्वर्णिम): राकेश व्यास (मो. 9977701999)
NEET- UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के तेवीस लाख छात्रों में निराशा और आक्रोश का माहौल है। पेपर लीक की चर्चाओं के बाद एक एजेन्सी NTA ने परीक्षा रद्द कर दी, जबकि मामले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है। छात्रों कि वर्षों की मेहनत के बावजूद बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं उनके सपनों और मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल रही हैं। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, लेकिन पेपर लीक होने की चर्चाओं के बाद आखिर National Testing Agency (NTA) ने परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक और एजेन्सी सीबीआई को इसकी जांच सोप दी है। बता दें कि इस निर्णय ने न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को भी झकझोर दिया है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत समर्पित की थी। इस परीक्षा के लिए दरअसल, पूरे देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में छात्रों और शिक्षकों ने इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विद्यार्थियों का कहना है कि वे पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार तैयारी कर रहे थे और ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने इसे ‘संगठित लूट’ बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है और सरकार पेपर लीक रोकने में पूरी तरह विफल रही है। कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पिछले 10 वर्षों में 89 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं और सरकार परीक्षा व्यवस्था को संभालने में नाकाम रही है। वहीं आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर हर बार पेपर लीक कैसे हो जाता है और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। फिलहाल देशभर के लाखों छात्र अब नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं | अगर हर साल बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जायेगा तो शायद आने वाले समय में बच्चे डॉक्टर बनने का सपना देखना बंद कर दें।