अपील पर अमल या सिर्फ दिखावा

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विशेष संपादकीय (मध्य स्वर्णिम) राकेश व्यास (मो. 9977701999)
पश्चिमी देशों के बीच छिड़ी जंग की वजह से वैश्विक मंदी के दौर से गुजर रहे भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से फिजूल खर्ची बंद करने का आह्वान किया है। लेकिन भाजपा नेता पीएम मोदी की अपील को अमल में लाने के लिए पब्लिक स्टंट कर रहे है। ऐसा में बड़ा सवाल यह है कि पीएम मोदी की अपील पर असल में अमल होगा या सिर्फ एक दिखावा बन रह जाएगा। एक तरफ विगत दिवस पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर शक्ति प्रदर्शन करते हुए मोदी की अपील के विरुद्ध 700 गाडियों का काफिला लेकर पदभार ग्रहण करने पहुंचे थे। वहीं दूसरी तरफ आज लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण ई रिक्शा से भाजपा कार्यालय पहुंचे। इनके अलावा भाजपा के जिला अध्यक्ष रविंद्र यति और दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी ने ई रिक्शा का इस्तेमाल किया। साथ ही खादी एवं ग्रामीण उद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन भी ई रिक्शा में बैठे नजर आये। नेताओं के इस दिखावे के बीच उनके समर्थक कार का काफिला लेकर नेता जी के पीछे पीछे चलते दिखाई दिए । जिसकी वजह से कई जगह पर ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित हो गई। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल ने भी अपने कार्यकर्ताओं से पेट्रोल डीजल की खपत कम करने की अपील की है। क्यों कि इस समय देश वैश्विक मंदी से जूझ रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को आने वाली विषम परिस्थितियों के प्रति सजग किया है। ऐसा नहीं है कि देश हित में प्रधानमंत्री ने पहली बार ऐसी अपील की हो 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद भी भारत का राजकोष तेजी से घट रहा था। राजकीय घाटे को कम करने के लिए इंदिरा गांधी ने देश से आह्वान किया था। वर्तमान दौर में भी यही स्थिति फिर से निर्मित हो रही है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से कच्चे तेल के दाम बहुत तेजी से बड़े है। इसकी वजह से 20 से अधिक खाड़ी देशों ने पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। लेकिन भारत ने अपने रिजर्व कोष से नुकसान की भरपाई की और जनता पर महंगाई का बोझ न बड़े इस बात की चिंता की। यदि हमनें बचत नहीं की और फिजूल खर्च कम नहीं किए तो रुपया और अधिक कमजोर हो जाएगा। जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा और देश को महंगाई के दलदल में जाने से कोई नहीं रोक सकता। भाजपा नेताओं ने भले ही ई रिक्शे का सांकेतिक इस्तेमाल किया हो यदि इसे वह गंभीरता से अमल में लाते हैं तो 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत की जा सकती है। पार्टी कार्यालय में होने वाली बैठक को भी वर्चुअली किया जा सकता है। ऐसा करने से नेताओं का मजमा नहीं लगेगा और फिजूल खर्च पर भी लगाम लगेगी।