संपादकीय (मध्य स्वर्णिम): राकेश व्यास (मो.9977701999)
कांग्रेस पार्टी में वैसे ऊपर ऊपर सब अच्छा नजऱ आ रहा लेकिन अंदर कुछ और ही माहौल है पूर्व नेता प्रतिपक्ष और सीधी जिले की चुरहट सीट से सात बार के कांग्रेस विधायक अजय सिंह ‘राहुल’ प्रदेश भर में दौरे पर निकले हैं। अजय सिंह ने पिछले महीने चार दिनों तक चंबल का दौरा किया। अब वे बुन्देलखंड के दौरा करके पुराने कांग्रेसियों से मिल रहे हैं। अगर विधानसभा चुरहट है विंध्य को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रहे ? अजय सिंह के पिता अर्जुन सिंह मप्र के मुख्यमंत्री और केन्द्र सरकार में मंत्री के साथ ही राज्यपाल भी रहे हैं। अजय सिंह भी मप्र सरकार में मंत्री और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। अब वे अपने विंध्य क्षेत्र के अलावा दूसरे क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रहे हैं। प्रदेश भर में दौरों में अजय सिंह के बयान से ये साफ बता रहे हैं कि वे अपनी जगह खुद बना रहे हैं। और चुनाव के पहले विंध्य क्षेत्र तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में अपनी टीम बनाने में जुटे हैं। जीतू पटवारी अभी ये समझ नहीं पा रहे की आखिर वो अपने वरिष्ठ नेता को कैसे समझाए की वो पार्टी के अध्यक्ष है न की अजय सिंह कही अध्यक्ष जी अपनी कुर्सी न खो दें। जो काम पटवारी को करना चाहिए वो काम अजय सिंह कर रहे है और सब जगह ये कह भी रहे है निवाड़ी में कहा कि जो कांग्रेसी घर में बैठे है उन्हें जोडऩे के लिए मैं यह यात्रा कर रहा हूं।अजय सिंह राहुल अपने पिता और स्वर्गीय अर्जुन सिंह से जुड़े पुराने कांग्रेसियों से भी मिल रहे हैं। मंचीय कार्यक्रमों के बजाए वे सिर्फ जिला कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मेल-मुलाकातें कर रहे हैं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घर जाकर मिल रहे हैं।वो दूसरी विधानसभा में अजय सिंह राहुल फरवरी के महीने में 11 से 15 फरवरी तक चंबल अंचल में घूमे। ग्वालियर से लेकर मुरैना, भिंड और दतिया जिले में वे पुराने कांग्रेसियों से मिले। लहार में डॉ. गोविन्द सिंह के निवास पर मीडिया से अजय सिंह ने कहा मैं प्रदेश की प्रत्येक उस विधानसभा में जाकर संपर्क करूंगा, जहां हमारे कार्यकर्ता शांत बैठे हैं या जागरुक नहीं है।जय सिंह राहुल ने प्रदेश के दौरे की शुरुआत चंबल अंचल से की। चंबल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में रही है। पिछले 2024 के लोकसभा चुनाव में सबसे कम अंतर से हारने वाली सीटें चंबल-ग्वालियर अंचल की ही थी। ऐसे में सिंह ने चंबल से दौरों की शुरुआत की है। मार्च को वे मुरैना जिले के पहाडगढ़़ में दलकू बाबा की प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की मौजूदगी में उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था- यहां के लोग विंध्य में रिश्तेदारी करने नहीं जाते, और वहां के लोग यहां शादी संबंध नहीं करते। अब समय आ गया है कि चंबल और विंध्य के बीच रिश्तेदारियां बढ़ेें। विंध्य क्षेत्र से लगे बुन्देलखंड में स्व अर्जुन सिंह के जमाने से कई कद्दावर कांग्रेसी अजय सिंह से जुड़े रहे हैं। लेकिन, अजय सिंह विंध्य क्षेत्र को छोड़कर बुन्देलखंड में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। मध्य प्रदेश गठन के पहले बुन्देलखंड भी विंध्य प्रदेश में शामिल था। अब अजय सिंह इस क्षेत्र में कांग्रेसियों के घर-घर जाकर संपर्क बढ़ा रहे हैं।
2028 में बनेगी कांग्रेस सरकार:
अजय सिंह ने टीकमगढ़ में कहा मैं ठंडे पड़े कांग्रेसियों में ऊर्जा भरने निकले हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2018 में भी उन्होंने पूरे प्रदेश में यात्रा निकाली थी और उस दौरान माला न पहनने का फैसला लिया था, जिसके बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी। उन्होंने कहा कि वह सरकार पूरी नहीं चल सकी, जिसकी वजहें अलग हैं। इस बार भी उन्होंने यात्रा के दौरान माला न पहनने का फैसला लिया है। अजय सिंह ने विश्वास जताया कि 2028 में फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी और इस बार वह पूरे 5 साल चलेगी भी। सभी से मिलकर उनको जागरुक करूंगा। किन्ही कारणों से घर बैठे वरिष्ट नेताओं से मिलकर रणनीति सीखने और समझने का प्रयास करूंगा। मतलब साफ़ है या तो कांग्रेसी जीतू पटवारी को पसंद नहीं करती या अजय सिंह जीतू को पद पर नहीं देखना चाहते क्योकि कई बार उन्होंने पटवारी के साथ मंच साधा करने से मना कर दिया देखते है अब अजय सिंह राहुल कांग्रेस को कैसे और किस तरह मज़बूत करते है।




