सुरक्षा उपायों की कमी और बदइंतजामी से हुआ हादसा

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): बरगी बांध में हुआ क्रूज हादसा प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। इन घटनाओं में मुख्य रूप से अचानक आए मौसम परिवर्तन, लापरवाही और सुरक्षा मानकों की कमी जैसे कारण सामने आए हैं । इन हादसों के बाद प्रशासन अक्सर प्रदेशभर में सुरक्षा आडिट और लाइफ जैकेट की अनिवार्यता के निर्देश जारी करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में कमी इन त्रासदियों का मुख्य कारण बनती है । वाटरफाल (झरनों) से जुड़े हादसों में प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने गए पर्यटकों के साथ कई बार नदी के अचानक जलस्तर बढ़ने या सेल्फी लेने के दौरान हादसे हुए हैं। जीवित बचे पर्यटकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया है कि क्रूज स्टाफ ने यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराए थे । कुछ यात्रियों ने स्वयं ही जैकेट ढूंढकर पहने, जबकि अधिकांश के पास यह सुरक्षा कवच नहीं था । मौसम की चेतावनी की भी अनदेखी की गई है। मौसम विज्ञान विभाग ने क्षेत्र में 40-50 किमी / घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया था। इसके बावजूद, पर्यटन विभाग के इस क्रूज को पानी में उतरने की अनुमति दी गई ।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2023 में पेयजल स्रोतों और नर्मदा से जुड़े बांधों में डीजल चालित मोटर नौकाओं के संचालन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद, बरगी बांध में पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन कर इस मोटराइज्ड क्रूज का संचालन किया जा रहा था घटना स्थल पर रेस्क्यू के कोई इंतजाम नहीं थे । अन्य पर्यटन केंद्रों में भी यही स्थिति है।

प्रदेश में क्रूज संचालन पर रोक:
पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने बरगी बांध में क्रूज पलटने के मामले में कहा कि ये बहुत बड़ी घटना हुई है, बहुत ही हृदयविदारक घटना है। मैंने विभाग को जांच के आदेश दिए हैं अगर कोई भी लापरवाही पाई जाती है तो कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। जितने क्रूज चल रहे हैं उनका पहले परीक्षण किया जाए, सुरक्षित होने पर ही संचालन किया जाएं।

मजिस्ट्रियल जांच की मांग:
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने बरगी बांध हादसे की मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुझे पता चला कि एनजीटी ने बांध में क्रूज चलाने से मना किया था तो क्रूज क्यों चलाया रहा था, किसके आदेश पर संचालित हो रहा था, उस अधिकारी पर कार्रवाई हो। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया तो फिर इसे अनदेखा क्यों किया गया। क्रूज में बैठे लोगों के पास लाइफ जैकेट क्यो नहीं थी। कई लापरवाही सामने आ रही है, मामले में मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए।

2006 में खरीदा था क्रूज:
विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना एक रेयरेस्ट ऑफ रेयर प्राकृतिक परिस्थिति का परिणाम हो सकती है, जहां तेज हवा, लहरों का असामान्य दबाव और जल की गति एक साथ मिलकर संतुलन बिगाड़ देती है। इस मामले में सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।क्रूज में जॉन डियर का 4-स्ट्रोक इंजन लगा था। यह प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप था और नियमित मेंटेनेंस और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती थी। उन्होंने बताया कि क्रूज को वर्ष 2006 में हैदराबाद बोट बिल्डर्स से खरीदा था, जिसकी लागत करीब 90 लाख रुपये बताई गई।