मंडला (मध्य स्वर्णिम): टाइगर स्टेट का तमगा लिए प्रदेश में कान्हा टाइगर रिजर्व से आई खबर ने गंभीर सवाल खडे कर दिए हैं। सरही परिक्षेत्र की प्रसिद्ध बाघिन अमाही (T – 141 ) के महज 6 दिन में उसके 3 नन्हे शावक जंगल में भूख से तड़प- तड़पकर मर गए। इनका पेट खाली था। वहीं चौथा शावक और बाघिन को गंभीर स्थिति में रेस्क्यू कर इलाज किया जा रहा है । आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनी कि बाघिन और उसके शावक शिकार के अभाव में भूख तड़पने लगे और तीन शावकों की अकाल मृत्यु हो गई।कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन अमाही के जिन तीन शावकों के शव जंगल में बुरी हालत में मिले थे, पीएम रिपोर्ट में सभी के पेट खाली पाए गए। आशंका है कि भूख के कारण इनकी मौत हुई है। 6 दिन में इनकी मौत और बाघिन व चौथे शावक के मौत की कगार पर पहुंचने के बाद पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है । मृत शावकों के पेट पूरी तरह खाली पाए गए हैं। वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि करीब एक साल की उम्र के ये शावक शिकार के लिए पूरी तरह अपनी मां बाघिन T – 141 पर निर्भर थे। अमाही बाघिन खुद इतनी कमजोर हो गई है कि, वह शिकार करने में असमर्थ दिख रही है, जिसके चलते शावक भूख से दम तोड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन को 17 अप्रैल को ही शावकों के कमजोर होने के इनपुट मिल गए थे ।
मौत की वजह कोई बीमारी तो नहीं ?
अप्रैल महीने में 3 शावकों सहित 4 बाघों की मौत और बाघिन ञ्ज-141 व उसके चौथे शावक की गंभीर स्थिति को देखते हुए तरह—तरह की आशंकाएं और कयास लगाए जा रहे हैं। जंगल में बाघ परिवार के सदस्यों की ये मौतें केवल भूख से हैं या इनमें कोई संक्रामक बीमारी तो नहीं फैल रही। जानकार बताते हैं कि कैनाइन डिस्टेंपर जैसी संक्रामक बीमारी के संक्रमण की आशंका से इंकार नहीं कर सकते। क्योंकि बाघिन अचानक इतनी कमजोर कैसे हो गई, जो अपने शावकों का पेट भी नहीं भर सकी थी। वहीं बाघिन और उसके चौथे शावक की हेल्थ को लेकर भी विशेषज्ञ चिंतित हैं।




