प्रीतम, प्रियतम बने रहेंगे !

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प्रसंगवश (मध्य स्वर्णिम): सुनील दत्त तिवारी (मो. 9713289999)
जैसी की अपेक्षा थी, पिछोर के बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी को भाजपा की प्रदेश इकाई ने तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने वाला नोटिस थमा ही दिया। हालांकि नोटिस की भाषा इस बार कुछ ज्यादा तल्ख है। आमतौर पर ऐसे पत्रों में संगठन आरोपित सदस्य से उसका पक्ष जानना चाहता है। 22 अप्रैल को जारी पत्र में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने शब्दों से कुछ ज्यादा ही कंजूसी करते हुए प्रीतम लोधी के आचरण को आपत्तिजनक मान ही लिया है। यह भी लिख दिया कि किया गया आचरण पार्टी के अनुशासन के अनुकूल नहीं है। यदि प्रथम दृष्टया पत्र की भाषा को समझने की कोशिश करें तो संगठन की नजर में विधायक प्रीतम सिंह लोधी दोषी दिखाई देते नजर आते हैं। क्या तीन दिन जब पूरे हो जाएंगे तो प्रीतम लोधी पर कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही देखने मिलेगी ? इस प्रश्न का उत्तर जानने से पहले पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी के पूर्व के बयानों और उन पर पार्टी का लचीला रुख भी ध्यान रखना होगा। हालांकि तब के बयान और अभी के ताजा घटनाक्रम में जमीन आसमान का अंतर स्पष्ट है। इस बार विधायक जी ने पूरी व्यवस्था को ही चैलेंज कर दिया है। जिसके खिलाफ पुलिस अधिकारियों का समूह लामबंद दिखाई दे रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि स्वयं मुख्यमंत्री भी विधायक के इस बड़बोलेपन से नाखुश हैं। अब उस प्रश्न का उत्तर ढूंढते हैं कि आखिर कोई कार्यवाई होती दिखाई दे रही है ? मेरी नजर में कोई बड़ी अनुशासनात्मक या कठोर कार्यवाई की गुंजाईश काम दिखती है। उसकी पहली वजह है टाइमिंग। …. आगामी 28 अप्रैल को भोपाल के जम्बूरी मैदान में उसी समाज की एक बड़ी रैली होने जा रही है, जिस समाज का प्रतिनिधित्व विधायक प्रीतम सिंह करते हैं। राजा हिरदेशाह के नाम पर लोधी – लोधा समाज की महारैली आयोजित की जा रही है। जिसमे कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल के अनुज पूर्व मंत्री जालम सिंह इस महा रैली को सफल बनाने जी-तोड़ मेहनत कर रहें हैं। लिहाजा तीन दिन के तुरंत बाद कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले संगठन का हिचकना लाजिमी है। इस लिहाज से 28 अप्रैल तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। दूसरा, जातीय समीकरण समझना भी जरूरी है। विधायक प्रीतम सिंह को जितनी आवश्यकता भारतीय जनता पार्टी की है, उतनी ही जरूरत पार्टी को ओबीसी और लोधी वोटों की है। अभी इस वर्ग का ख़ासा झुकाव बीजेपी की तरफ रहता है यही वजह है कि कैबिनेट में प्रह्लाद सिंह के बाद धर्मेंद्र लोधी को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी इसी समाज से और नेताओं को सक्रिय करना चाह रही है ताकी उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों में इसका प्रभाव दिखाई दे। फिर प्रीतम लोधी ने जो भी बयान दिए वह स्वभावगत क्रिया की प्रतिक्रिया ही थी। क्योंकि, एक जनप्रतिनिधि के स्वाभिमान को एक अधिकारी द्वारा ललकारा गया था और उसने प्रत्युत्तर दिया । भाषा अमर्यादित थी, धमकाने वाली थी जैसे अनेक विशेषण लगाए जा सकते हैं, और यही तो प्रीतम सिंह लोधी की यूएसपी है। आजकल राजनीती में यूएसपी ही तो कमाल कर रही है। हम सब जानते हैं कि वर्तमान दौर में इस रॉबिनहुड की छवि को ही प्रमोट किया जा रहा है। लिहाजा इसको लिखने में कोई संकोच नहीं है कि-
“मौसम आएंगे जायेंगे… हम तुम को नोटिस देकर भूल जाएंगे। कुछ दिनों बाद हल्ला मचाने वाले भी शांत हो जाएंगे”