भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्यप्रदेश के शिवपुरी में पांच लोगों को थार से कुचलने के मामले में बेटे के बचाव में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने पुलिस को दी धमकी पर आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई है। विधायक के पुलिस को धमकी देने और आपत्तिजनक बयान के वायरल वीडियो को लेकर प्रशासिक हलकों में हलचल तेज हो गई है । मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन, विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा आईपीएस अधिकारी डॉ. आरुष जाखड़ के संबंध में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे अनुचित एवं अस्वीकार्य बताया है। बता दें यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देशभर में सिविल सेवा दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे अवसर पर अधिकारियों के सम्मान और गरिमा से जुड़े मुद्दे को लेकर यह प्रतिक्रिया और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है । भारतीय और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है । भारतीय पुलिस सेवा संघ के अध्यक्ष चंचल शेखर की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में जिस प्रकार की भाषा का उपयोग किया गया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि सार्वजनिक जीवन की गरिमा के भी विपरीत है। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और उनके परिवार के प्रति कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं, जिसे गंभीरता से लिया गया है। एसोसिएशन ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां पुलिस बल के मनोबल को प्रभावित करती हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती हैं । जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखें और मर्यादित भाषा का उपयोग करें। प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार के आचरण को किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किया जा सकता । एसोसिएशन ने संबंधित मामले में उचित और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ।
कार्रवाई नहीं तो आंदोलन होगा:
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के विवादित बयान के बाद तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है। संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आए बयान से प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों में दहशत का माहौल बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा और व्यवहार से यह संदेश जा रहा है कि प्रदेश में कानून का डर कमजोर पड़ रहा है। तिवारी ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि ही इस तरह के बयान देंगे, तो प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी और कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा। तिवारी ने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत हो तो उसे नियमानुसार संबंधित मंच पर रखा जाना चाहिए, न कि धमकी या दबाव की भाषा अपनाई जाए।कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उचित कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश के लाखों अधिकारी-कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।




