नारी शक्ति वंदन : अड़ा विपक्ष, नहीं किया अभिनंदन

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर लंबी और गहन चर्चा के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। कुल 523 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें 298 सदस्यों ने विधेयक के पश्न में और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दी तिहाई बहुमत यानी 352 वोट प्राप्त नहीं हो सके। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि यह विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका, इसलिए आगे की विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके बाद संबंधित दो अन्य विधेयकों पर भी सरकार ने मतदान कराने का निर्णय नहीं लिया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।

लंबी बहस के बाद फैसला:
इस विधेयक पर सदन में करीब 21 घंटे तक विस्तृत चर्चा चली, जिसमें कुल 130 सांसदों ने भाग लिया। इनमें 56 महिला सांसद भी शामिल रहीं, जिन्होंने अपने अपने पश्च रखे। चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और स्पष्ट किया कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में एससी-एसटी (SC-ST) समुदाय की सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही, धर्म के आधार पर आरक्षण की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए शाह ने दक्षिणी और छोटे राज्यों को परिसीमन के बाद भी उनके उचित प्रतिनिधित्व का पूर्ण आश्वासन दिया है। वोटिंग से ठीक पहले गृह मंत्री के इस कड़े रुख ने इस विधेयक के ऐतिहासिक महत्व और राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह केवल पहिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि चुनावी व्यवस्था में बदलाव की कोशिश थी। उनके मुताबिक, यह संविधान की मूल भावना पर हमला था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया।

यह संविधान पर हमला था, जिसे हमने हरा दिया: राहुल गांधी
लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। सदन में इस बिल की हार को विपक्ष की बड़ी सफलता बताते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक सीधे तौर पर भारत के संविधान पर एक हमला था, जिसे हमने हरा दिया है। गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि विपक्ष ने पहले ही कह दिया था कि यह महिलाओं का बिल नहीं है, बल्कि भारत की चुनावी संरचना को बदलने का एक प्रयास है। लोकसभा में बिल गिरने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोडऩे के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। राहुल गांधी ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिलाएं हमारे राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक प्रमुख प्रेरक शक्ति हैं। हालांकि, उन्होंने मौजूदा बिल को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई महिला बिल नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है।

बिल में क्या था प्रस्ताव ?
संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 350 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।