भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मभूमि पर उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। बाबा साहेब एक ऐसे युग दृष्टा थे, जिन्होंने एक हजार साल की गुलामी की कठिनाइयों को दूर करने और समाज के अंदर समानता के भाव को विकसित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। बाबा साहेब के योगदान से हम सभी गौरवान्वित होते हैं। हमें उनके बनाए संविधान के अनुसार ही चलना चाहिए। इससे श्रेष्ठ संविधान और कोई नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिला समानता और सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों और उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने बहनों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिलाने, तलाक के समय मुआवजा और मातृत्व अवकाश दिलाने के लिए सराहनीय कार्य किया। उन्होंने हमें माताओं-बहनों के लिए समान काम समान वेतनक्र का दूरदृष्टि पूर्ण विचार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर के डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जन्मभूमि परिसर में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब महिला सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए बाबा साहेब ने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी। न्यूनतम मजदूरी, कंपनी लॉ और महिला श्रमिकों को अधिकार हमें बाबा साहेब की ही देन है। केन्द्र सरकार संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय लेने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अनुयायियों संग सहभोज कर दिया समरसता का संदेश:
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जन्मस्थली स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए अनुयायियों के साथ सहभोज कर सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के साथ पंक्तिबद्ध बैठकर सह भोज किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर का जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। इस प्रकार का सहभोज समाज में भेदभाव मिटाने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है।




