भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश में गरीबों के फ्री इलाज की सबसे बड़ी योजना आयुष्मान भारत निरामयम को बड़ा झटका लगा है। 1 अप्रैल 2026 से लागू लागू नए नियम के तहत 126 निजी अस्पतालों की आयुष्मान योजना में मान्यता खत्म हो गई है। इनमें भोपाल के 51 और इंदौर के 30 अस्पताल शामिल हैं। आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ डॉ। योगेश भरसट ने स्पष्ट किया कि यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बिना एनएबीएच सर्टिफिकेट वाले अस्पताल अब आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान कार्ड पर भरोसा करने वाले लाखों गरीब, वंचित और आदिवासी परिवार इलाज की उम्मीद लगाए बैठे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में 80 प्रतिशत निजी अस्पताल इस नियम से प्रभावित हो सकते हैं। खासकर छोटे और मध्यम अस्पतालों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को अब बड़े अस्पतालों की ओर जाना पड़ेगा जहां ओवर क्राउडिंग बढने की आशंका है।
आम मरीजों पर सीधा असर:
नए नियम का मकसद प्राइवेट अस्पतालों में गुणवत्ता सुधारना है लेकिन इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। चार प्रमुख शहरों में कुल 395 आयुष्मान अस्पताल हैं जिनमें से 212 एंट्री लेवल पर हैं और सिर्फ 59 के पास फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट है। बिना किसी एनएबीएच प्रमाणपत्र वाले अस्पताल तुरंत योजना से बाहर हो जाएंगे जबकि एंट्री लेवल वाले अस्पतालों को दो साल के अंदर अपग्रेड करना होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के 80 प्रतिशत अस्पताल प्रभावित हो सकते हैं। इंदौर में तो सिर्फ 10-12 अस्पतालों के पास एनएबीएच सर्टिफिकेट है। ऐसे में लाखों मरीजों के लिए इलाज का विकल्प सीमित हो जाएगा। भोपाल में 51, इंदौर में 30 अस्पतालों की मान्यता प्रभावित हुई है। ग्वालियर और जबलपुर भी इस सूची में शामिल हैं।




