
खबर अंदर की (मध्य स्वर्णिम): ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार (मो. 9425002527)
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक बहुप्रतीक्षित निगम – मंडल की सूची जारी नहीं हो पाई है। केवल ग्वालियर में दो बड़े नेताओं के बीच में अपने-अपने वर्चस्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच केंद्रीय नेतृत्व ने जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर तीसरी लाइन खड़ी कर दी है। ताकि ग्वालियर संभाग के कार्यकर्ताओं के बीच में यह मैसेज जा सके कि पार्टी कभी भी चौंकाने वाले फैसले ले सकती है। इतना ही नहीं प्रदेश भाजपा कार्यालय में उनके स्वागत के लिए सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को फोन करके उपस्थित रहने के लिए कहा गया, जो शायद पहली बार हुआ हो। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत विजय कुमार खंडेलवाल बुधवार को एक साथ पुन: नई दिल्ली गए है। इस बार वे केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करके निगम-मंडल की सूची पर मुहर लगाकर ही वापस लौटेंगे। क्योंकि जैसे-जैसे समय होते जा रहा है वैसे-वैसे निगम-मंडल के दावेदारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। प्रदेश भाजपा संगठन के लिए इस बार राजनीतिक समीकरणों को साधना भी सबसे बड़ी चुनौती है। जिसे बैलेंस बनाने के लिए मोहन-हेमंत की जोड़ी अपने साथ निगम-मंडल में शामिल होने वालों की सूची लेकर गई है। जिसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी पांच समर्थकों के नाम शामिल है, जिस पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व लेगा। हमारे सूत्रों के अनुसार करीब 30 से अधिक निगम-मंडलों में नियुक्ति होना है। नई दिल्ली में मोहन-हेमंत की केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम चर्चा के बाद कभी भी औपचारिक घोषणा हो सकती है। निगम-मंडलों में उन पूर्व मंत्रियों का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो विधानसभा चुनाव हार गए थे। हालांकि पार्टी नए चेहरों को सामने लाने पर फोकस कर रही है। साथ ही परिवारवाद और पट्ठावाद को पूरी तरह से खत्म करने पर जोर है। हालही में अभी एक दिन पहले आरएसएस, पार्टी, सत्ता और संगठन के बीच एक बड़ी बैठक हुई है, जिसमें आगामी पार्टी कार्यक्रमों, योजनाओं, मंत्रियों के काम-काज की समीक्षा के साथ ही निगम-मंडलों में नियुक्तियों पर भी चर्चा हुई है, जिसे भले ही वर्ष में होने वाली समन्वय बैठक का नाम दिया गया। बताते है कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत विजय कुमार खंडेलवाल के बीच में जबरदस्त केमिस्ट्री है, जिसकी जानकारी मोदी-शाह सहित आरएसएस को भी है। इसलिए यह बात तो तय है कि निगम-मंडलों की नियुक्ति में ‘मोहन-हेमंत’ के नामों को दरकिनार नहीं किया जाएगा।
सिंधिया फैक्टर कितना प्रभावी…?
निगम-मंडलों में नियुक्तियों में देरी को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हस्तक्षेप की बात कही जा रही है। लेकिन,हमारे सूत्रों का दावा है कि निगम मंडलों की लिस्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद को पर्याप्त तरजीह दी गई है। विलंब को लेकर सिंधिया फैक्टर की बात सिरे से बेमानी है। शीर्ष और प्रादेशिक नेतृत्व की मंशा ऐसे संतुलित प्रतिनिधित्व की है जो विकसित भारत 2047 के विजन के लिए संकल्पित और समर्पित हों। इसलिए सभी वर्गों और ‘स्टेक होल्डर्स’ से लंबी मंत्रणा करने के बाद ही अंतिम रूप दिया गया है।




