वाशिंगटन (मध्य स्वर्णिम): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जिन देशों ने ईरान युद्ध में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, उन्हें अब हिम्मत जुटानी चाहिए। वे होर्मुज स्ट्रेट जाएं और उस पर कब्जा कर लें। अमेरिका अब उनकी कोई मदद नहीं करेगा। ईरान के साथ चल रहे युद्ध को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर कोहराम मचा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इस मुद्दे पर तीखा बयान देते हुए कहा कि युद्ध में हिस्सा न लेने वाले लेकिन ईंधन संकट से जूझ रहे देश अब खुद हार्मुज स्ट्रेट जाकर अपना तेल लाएं। हम उनकी कोई मदद नहीं करेंगे। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा कि जिन देशों ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, उन्हें अब हिम्मत जुटानी चाहिए। वे जलडमरूमध्य जाएं और उस पर कब्जा कर लें। अमेरिका अब उनकी कोई मदद नहीं करेगा। ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका अब आपकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारी मदद के लिए मौजूद नहीं थे। ईरान लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है। मुश्किल काम तो हमने कर दिया है। अब जाओ और अपना तेल लेकर आओ। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने खासतौर पर उन सहयोगी देशों का जिक्र किया, जिन्हें हार्मुज जलडमरूमध्य में जेट ईंधन परिवहन बाधित होने के कारण संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने ब्रिटेन समेत उन देशों से कहा कि वे इस स्थिति को ‘स्वीकार’ कर लें।
ट्रंप की वॉर्निंग पर भड़का ईरान, तेल से भरे जहाज पर दाग दिया ड्रोन:
तेहरान ने मंगलवार को दुबई के पास पूरी तरह से भरे तेल टैंकर शिप पर हमला किया और उसे जला दिया। दुबई के अधिकारियों ने कहाकि ड्रोन हमले के बाद कुवैत का झंडा लगे अल- सल्मी जहाज पर लगी आग को कंट्रोल कर लिया गया है। अच्छी बात यह है कि तेल का कोई रिसाव नहीं हुआ और चालक दल को कोई चोट नहीं आई। जहाज के मालिक कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कहाकि हमले में जहाज क्षतिग्रस्त हो गई थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में यह सबसे ताजा घटना है। एलएसईजी आंकड़ों के मुताबिक जहाज चीन के किंगदाओ की ओर बढ़ रहा था। निगरानी सेवा टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम के मुताबिक इसमें 1.2 मिलियन बैरल सऊदी कच्चा तेल और 800000 बैरल कुवैती कच्चा तेल था। अल-सल्मी संभवत: टारगेट नहीं था। ईरान के रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहाकि उन्होंने खाड़ी में एक कंटेनर जहाज को टारगेट किया था, क्योंकि उसका संबंध इजरायल से था।
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