मप्र में घटते जंगल, मुश्किल में टाइगर की जान, प्रदेश में 371 वर्ग किलोमीटर जंगल हो गया कम

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मप्र को देश का ऑक्सीजन सेंटर माना जाता है, लेकिन दुखद बात यह है कि एमपी अब खुद सांस लेने के लिए जूझ रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 371 वर्ग किलोमीटर जंगल कम हो गया है। यह गिरावट न केवल पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि वन्यजीवों, खासकर बाघों के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर रही है।

जंगलों की कटाई छीन रही पहचान:
घने जंगल, वाइल्ड लाइफ और वन्यजीव ही हमेशा से मध्यप्रदेश की पहचान रहे हैं। लेकिन अवैध कटाई और अतिक्रमण ने जंगलों की स्थिति को बेहद खराब कर दिया है। चिंताजनक बात यह है कि वन विभाग इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण करने में नाकाम साबित हो रहा है। राजनैतिक संरक्षण में अतिक्रमण और वन भूमि पर कब्जे के मामले सामने आए हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का कहना है कि एमपी के जंगलों में टाइगर के साथ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ जीव जंतु भी रहते हैं। टाइगर्स के संरक्षण के लिए शाकाहारी जीव जंतुओं का जंगल में होना भी जरूरी है, जिनका वो शिकार करते हैं। इसके लिए बड़े घास के मैदानों को बचाना होगा, जहां धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहा है।