नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की संयुक्त जंग से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच चुका है, जहां एक तरफ लगातार हवाई हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ जवाबी कार्रवाइयां तेज हो गई हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल निर्यात होता है। ईरान ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब ईरान पर हमला करने वाले देशों के लिए सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक जलमार्ग किसी भी ऐसे देश के लिए खुला नहीं होगा, जो इसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। उन्होंने कहा, जहाज इस जलडमरूमध्य से केवल विशेष परिस्थितियों में ही गुजर सकते हैं। क्षेत्रीय असुरक्षा अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण पैदा हुई है।
होर्मुज को लेकर ट्रंप की मांग:
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से होर्मुज की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की है, लेकिन कई देश अभी तक आगे नहीं आए हैं।तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। ईरान के इस कदम से युद्ध और लंबा खिंच सकता है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है।
ब्रिटेन, स्पेन और अमेरिका में मतभेद उजागर:
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद के लिए युद्धपोतों को तैनात करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है, एक ऐसा निर्णय जिससे लंदन और वाशिंगटन के बीच तनाव और गहराने का खतरा है।




