जबलपुर (मध्य स्वर्णिम): आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर वृद्ध को तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर 76 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक आरोपी को उत्तर प्रदेश के कानपुर और दूसरे को लकीमपुरखीरी से गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य कमीशन पर बैंक खाता किराए पर लेकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे । क्राइम ब्रांच एएसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि अनिल कुमार नन्हौरया के पास विगत 28 नवंबर की सुबह फोन आया था। फोन करने वाले ने बताया था कि मैं डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से बोल रहा हूं। आपके नाम से जारी मोबाइल सिम का उपयोग कर लोगों को डराया धमकाया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट दिल्ली थाने में दर्ज करवाई गयी है और थाने आकर आपको बयान दर्ज करना होगा। उसकी प्रार्थना पर उन्होंने दिल्ली थाने का फोन का नंबर देकर टेलीफोन के माध्यम से बयान दर्ज करवाने के लिए कहा था। पीड़ित ने कॉल लगाकर कथित आईपीएस विजय कुमार से बात की। कथित आईपीएस विजय कुमार ने वीडियो कॉल लगाकर बात की और उन्हें व्हाट्सएप पर केस की जानकारी दी। इसके कुछ देर पर पुनः वीडियो कॉल बताया कि आप सीबीआई में दर्ज सदाकत खान ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध हैं। सदाकत खान के पास आपके नाम का एटीएम कार्ड मिला है। सदाकत खान केस की जानकारीऔर मेरे संदिग्ध होने की सुप्रीम कोर्ट के पत्र की प्रति व्हाट्सएप पर भेजी गयी थी। विजय कुमार ने बताया कि ये एक सीक्रेट मिशन है। इसकी जानकारी किसी को भी देने पर 3 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना का प्रावधान है। फर्जी आईपीएस अधिकारी इसके बाद प्रत्येक 3 घंटे में व्हाट्स एप पर अपनी लोकेशन, एक्टिविटी की जानकारी प्राप्त करता रहा। दूसरे दिन व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर सूचित किया कि आपके नाम का अरेस्ट वारंट और जब्ती की तुरंत कार्रवाई के आदेश हैं। इनमें छूट के लिए प्रॉयरिटी इन्वेस्टीगेशन करना होगा, जिसके लिए कथित सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करनी होगी।




