बोत्सवाना से 8 और चीते मध्य प्रदेश आएंगे

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श्योपुर (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश में चीतों को फिर से बसाने और उनकी सुरक्षा के प्रयासों को बड़ा बढ़ावा मिला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि 28 फरवरी तक बोत्सवाना से 8 और चीते मध्य प्रदेश आ जाएंगे। यह कदम इस साल के अंत तक राज्य में चीतों की संख्या 50 तक पहुंचाने के मुख्यमंत्री के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। इसी बीच, दक्षिण अफ्रीका की मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क में तीन शावकों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में चीता पुनर्प्रजनन परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि इसने प्रकृति से प्रगति का एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि प्रोजेक्ट चीता दुनिया का सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण अभियान बनकर उभरा है। सरकार ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर प्रोजेक्ट चीता के तीन सफल वर्षों पर प्रकाश डाला। बिज्ञसि में कहा गया, भारत की चीता विलुति के बाद उन्हें फिर से देश में बसाने की पहल ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। विज्ञप्ति में आगे कहा गया, सितंबर 2022 में शुरू हुई यह संरक्षण यात्रा लगातार स्थायी सफलता की ओर बढ़ी है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते भारतीय परिस्थितियों में अच्छी तरह से ढल गए हैं। कुनो और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में दूसरी पीढ़ी के शावकों का जन्म सीएम मोहन यादव के प्रभावी नेतृत्व में पीएम मोदी के दृष्टिकोण की प्राप्ति को दर्शाता है। भारतीय अभयारण्यों में चीतों को दौड़ते देखना जैव विविधता संरक्षण के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। इससे पहले, 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क के संरक्षित बाड़ों में छोड़ा था, जिसने महत्वाकांक्षी चीता पुनर्प्रजनन परियोजना की औपचारिक शुरुआत की थी। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो में लाया गया था। सरकार का लक्ष्य 2032 तक लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60-70 चीतों की एक आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। सरकार ने शनिवार को बताया कि इस उद्देश्य के लिए गुजरात के कच्छ के रण (बन्नी घास के मैदान) में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।