नई दिल्ली: भारत में बनने वाली हैमर मिसाइलों को राफेल लड़ाकू विमानों में फिट किया जाएगा। राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में होने जा रहा है। राफेल विमानों की सबसे बड़ी ताकत हैमर मिसाइलें हैं, जिनका निर्माण भी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) की मदद से भारत में ही होगा। भारत के पास पहले से मौजूद लड़ाकू विमानों में भी हैमर मिसाइलें फिट हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। हवा से सतह में मार करने वाली हैमर मिसाइलों के निर्माण को लेकर भारत और फ्रांस के बीच मंगलवार को समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसके तहत फ्रांस की कंपनी सैफरान और बीईएल 50-50 फीसदी की भागीदारी में संयुक्त उपक्रम स्थापित कर हैमर मिसाइलों का निर्माण करेंगे। रूस के साथ ब्रह्मोस मिसाइलों के उत्पादन के बाद मिसाइल निर्माण को लेकर भारत का यह दूसरा संयुक्त उपक्रम है। राफेल लड़ाकू विमानों में हैमर मिसाइलों का इस्तेमाल होता है, जो उसे सटीक हमला करने में सक्षम बनाती हैं। ये मिसाइलें हवा में 70 किलोमीटर तक अचूक निशाना लगा सकती हैं। इसके कई संस्करण हैं, जिनकी क्षमता 150-1,000 किलोमीटर तक के बम तथा विस्फोटक ले जाने की होती है।




