भोपाल (मध्य स्वर्णिम):
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मध्य प्रदेश का बजट पेश किया है। बजट 4.38 लाख करोड़ रुपए का है। यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा बजट है। बजट में पुरानी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ज्यादा जोर दिया गया है। साथ ही प्रदेश की जनता पर कोई नया कर नहीं लगाया है। सरकार ने पहले से चल रही योजनाओं में कोई कटौती नहीं की है।सरकार ने इस बार के बजट में सामाजिक क्षेत्र और महिलाओं के विकास पर बल दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग का बजट 32,730 करोड़ रुपए है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण का बजट 22,363 करोड़ रुपए, आयुष विभाग का बजट 1210 करोड़ रुपए और भोपाल गैस त्रासदी, राहत एवं पुनर्वास विभाग का बजट 175 करोड़ रुपए किया गया है।सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बजट बढ़ाया है। स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 36,730, उच्च शिक्षा विभाग का 4,247, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का बजट 2932 करोड़ रुपए किया है। इसके साथ ही खेल एवं युवा कल्या विभाग का बजट 715 करोड़ रुपए और विज्ञान एवं प्रद्योगिकी विभाग का बजट 734 करोड़ रुपए हुआ है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के बजट 15,015 करोड़ रुपए, सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग का बजट 4570 करोड़ रुपए, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का 2,591 करोड़ रुपए, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का 1793 करोड़ रुपए और घुमन्त अर्ध घुमन्त कल्याण विभाग का बजट 55 करोड़ रुपए है।इस बजट में किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के लिए 31,759 करोड़ रुपए का फंड है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के लिए 1863 करोड़ रुपए का बजट है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के लिए 2365 करोड़ रुपए का बजट है। इसके साथ ही सहकारिता विभाग का बजट 1679 करोड़ रुपए हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग का बजट 772 करोड़ रुपए है। मछुआ कल्याण और मतस्य विभाग का बजट 413 करोड़ रुपए है।वहीं, नगरीय विकास एवं आवास विभाग का बजट 21,562 करोड़ रुपए का है। ग्रामीण विकास विभाग का बजट 29,663 करोड़ रुपए है। पंचायत विभाग का बजट 10,440 करोड़ रुपए का है।इसके साथ ही संस्कृति विभाग का बजट 1365 करोड़ रुपए का है। पर्यटन विभाग का 566 करोड़, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का 127 करोड़ रुपए का बजट है। आनंद विभाग का बजट 15 से घटकर 12 करोड़ रुपए का हो गया है।वहीं, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग का बजट 3814 करोड़ रुपए का है। सूक्ष्म, लगु और मध्यम उद्यम विभाग का बजट 2144 करोड़ रुपए का है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग का बजट 145 करोड़ रुपए का है। इसके साथ ही सरकार ने गृह और राजस्व विभाग का भी बजट बढ़ाया है। गृह विभाग का बजट 13411 करोड़ रुपए, राजस्व विभाग का 13876 करोड़ रुपए, वन विभाग का 6121 करोड़ रुपए, विधि एवं विधायी कार्य विभाग का 3829 करोड़ रुपए, सामान्य प्रशासन विभाग 1172 करोड़ रुपए, श्रम विभाग का 1336 करोड़ रुपए, जेल विभाग का 895 करोड़ और संसदीय कार्य विभाग का 153 करोड़ रुपए का है।वहीं, वाणिज्यिक कर के 4180, खनिज विभाग के 2784, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के 987, जनसंपर्क विभाग के 884, विमानन विभाग के 1139, परिवहन विभाग के 230, लोक सेवा प्रबंधन विभाग के 73, पर्यावरण विभाग के 31, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के 33 और प्रवासी भारतीय विभाग के 15 करोड़ रुपए का बजट है।
इस बार का बजट रोलिंग बजट के रूप में बताया गया। इसके साथ ही इस तरह का बजट देने वाला मध्य प्रदेश देश में पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह देश का पहला रोलिंग बजट है, जिसमें दो वर्षों का खाका प्रस्तुत किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष को कृषि को समर्पित किया गया है और किसान कल्याण के लिए 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है। ये बजट GYANII के स्वरूप में है। इसमें गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान), नारी, इंफ्रास्ट्रक्कर और इंडस्ट्रियलाइजेशन पर फोकस है। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘Gyani’ पर आधारित है और इसमें ‘I’ यानी Industry को जोड़कर इसे विकास और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। रोलिंग बजट जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि जो रोल होता रहे यानी कि गतिशील बजट । ये एक ऐसा बजट होता है जो समय-समय पर अपडेट किया जाता है ताकि योजना हमेशा वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार बनी रहे। रोलिंग बजट प्रणाली में तय अवधि के बाद आगे की अवधि को जोड़ते हुए बजट लगातार अपडेट किया जाता है। बजट एक बार बनाकर छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि हर साल नई परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार उसमें बदलाव किया जाता है।
नारी सशक्तिकरण पर खास ध्यान:
बालिकाओं के जन्म से शिक्षा और विवाह तक समर्थन के उद्देश्य से वर्ष 2007 में शुरू की गई लाडली लक्ष्मी योजना को वर्ष 2022-23 से लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 के रूप में लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 52 लाख 29 हजार बालिकाओं को लाभान्वित किया गया है, जबकि 14 लाख 12 हजार बालिकाओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इसके लिए 1 हजार 801 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। नारी स्वाभिमान और स्व-निर्भरता से जुड़ी लाडली बहना योजना में वर्तमान में लगभग 1 करोड़ 25 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं। लाडली बहनों को प्रतिमाह दी जाने वाली राशि 1 हजार 250 रुपये से बढ़ाकर 1 हजार 500 रुपये कर दी गई है। इस योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है, जो बजट में महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता के रूप में महत्वपूर्ण हिस्सा दर्शाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रारंभ से अब तक 51 लाख 76 हजार हितग्राहियों का पंजीयन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 210 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और वर्ष 2026-27 के लिए 386 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। कामकाजी महिलाओं के लिए उज्जैन, धार, रायसेन, भिंड, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम और झाबुआ जिलों में सखी-निवास निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशक्ति योजना के अंतर्गत अब तक 41 हजार 767 स्वसहायता समूहों और 4 हजार 165 महिला उद्यमियों को लाभान्वित किया गया है।
ग्रामीण विकास के लिए 40,062 करोड़ रुपये:
आगामी वर्ष में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चतुर्थ चरण में 1,845 किलोमीटर लंबाई के 867 मार्गों का निर्माण प्रस्तावित है। पीएम जनमन (सड़क) अंतर्गत 879 किलोमीटर मार्ग और 60 पुल बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के तहत 2 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण और 180 क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026-27 में 8 हजार किलोमीटर सड़कों का पुनः डामरीकरण, 600 किलोमीटर सड़कों का उन्नयनीकरण और 89 हजार किलोमीटर सड़कों के संधारण का लक्ष्य निर्धारित है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्माणाधीन 7 लाख 32 हजार आवासों में से 4 लाख आवास मार्च 2026 तक पूर्ण होने का लक्ष्य है। पीएम जन-मन आवास योजना के तहत 50 हजार आवास निर्माणाधीन हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में 2 लाख व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय और 505 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। पंचायतों को मूलभूत सेवाओं हेतु अनुदान के रूप में 3 हजार 736 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 6 हजार 850 करोड़ रुपये, विकसित भारत जी राम जी योजना के लिए 10 हजार 428 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री जनमन योजना (आवास) के लिए 900 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री जनमन योजना (सड़क) के लिए 603 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण एवं सहायक योजनाओं के लिए 1 हजार 884 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं सहायक योजनाओं के लिए 807 करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 400 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 300 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
प्रजासुखे सुखं राज्ञ: प्रजानां च हिते हितम्:
वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 21 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग शामिल है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 गांवों में कार्य किए जा रहे हैं, जिससे करीब 94 लाख लोग लाभान्वित होंगे। वर्ष 2026- 27 के लिए इस अभियान हेतु 793 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार ने पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के पारंपरिक व्यवसायों को प्रोत्साहित करने तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है। छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत 7 लाख 50 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया। सरदार पटेल कोचिंग योजना के तहत 4 हजार विद्यार्थियों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित है।विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ समुदायों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा प्रोत्साहन, बस्ती विकास और स्वरोजगार योजनाएं संचालित हैं। बजट में इन वर्गों के लिए 1 हजार 691 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।प्रदेश में जीवन प्रत्याशा बढऩे और वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए भोपाल में सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम संध्या छाया प्रारंभ किया गया है। प्रदेश में चल रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत वर्तमान में 54 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ दिया जा रहा है।राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, दिव्यांग सहायता, मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना, माता-पिता भरण-पोषण योजना और अटल वयो-अभ्युदय योजना सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 5 करोड़ 25 लाख हितग्राहियों को 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का 66 लाख 25 हजार मीट्रिक टन नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 93 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है और उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केंद्र के रूप में उन्नत किया जा रहा है।
युवा कल्याण पर विशेष जोर:
प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पी.एम.श्री योजना के अंतर्गत 799 विद्यालय संचालित हैं। साथ ही 274 सांदीपनि विद्यालय भी कार्यरत हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। छात्रों तक पहुँच आसान बनाने के लिए 4 लाख 85 हज़ार साइकिलें वितरित की गई हैं। 94,300 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए गए हैं।प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के लिए 15,000 शिक्षकों की नियुक्तियाँ प्रक्रियाधीन हैं। विद्यालय भवनों के संधारण एवं रख-रखाव कार्य योजनाबद्ध रूप से किए जा रहे हैं। शिक्षा संबंधी प्रमुख योजनाओं जैसे सांदीपनि विद्यालय में 3,892 करोड़, साइकिल वितरण योजना में 210 करोड़, पी.एम.श्री योजना में 530 करोड़ और नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों की योजना में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित 25,439 विद्यालयों में लगभग 20 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 94 सांदीपनि विद्यालयों को उत्कृष्ट अधोसंरचना और शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में लगभग 3,40,000 विद्यार्थियों को 458 करोड़ रुपये से अधिक की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की गई। अनुसूचित जनजाति की शैक्षणिक संस्थाओं हेतु 4,485 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रियाधीन है। छात्रवृत्ति की विभिन्न योजनाओं के लिए 2026-27 के बजट में 986 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को बूस्टर डोज:
प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं।इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा।वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष फोकस:
मध्यप्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 23,747 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि यह बजट प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा, स्वास्थ्य मानव की पूंजी है। हमारी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। डिजिटल स्वास्थ्य पहल के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अब तक 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज और पांदुर्णा में नए जिला चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। विशेष ध्यान उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिया गया है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थाओं में 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं।फाइनेंस मंत्री देवड़ा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 5 नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय शुरू किए गए हैं। एम.बी.बी.एस पाठ्यक्रम की सीटें 2,275 से बढ़ाकर 2,850 की गई हैं।
पांच साल में बढ़ी विकास रफ्तार:
पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बजट की रफ्तार चौंकाने वाली है। साल 2022-23 में बजट का कुल प्रावधान 2,24,237 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 3,14,025 करोड़ हुआ। इसके बाद 2024-25 में यह आंकड़ा 3,65,067 करोड़ के पार निकल गया। पिछले साल (2025-26) बजट का संशोधित अनुमान करीब 4,21,032 करोड़ रहा और आज पेश हुआ बजट 4,38,317 करोड़ को पार कर गया है। यह बढ़ोतरी बताती है कि राज्य की कमाई और खर्च करने की क्षमता दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है।बजट का आकार बढऩे का सीधा असर आम आदमी की आय पर भी दिखा है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, साल 2011-12 में प्रदेश के व्यक्ति की औसत सालाना आय जो मात्र 38,497 थी, वह अब बढ़कर 1,69,050 (2025-26 अग्रिम अनुमान) हो गई है। इसका मतलब है कि 5 साल पहले की तुलना में लोगों की खरीदने की शक्ति बढ़ी है। सरकार ने इस बढ़े हुए बजट का बड़ा हिस्सा लाडली बहना योजना (23,800 करोड़), किसान कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया है। राज्य का जीएसडीपी भी 11.14 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो इसे देश की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाता है।
यह बजट समृद्ध मध्यप्रदेश, सम्पन्न मध्यप्रदेश, सुखद मध्यप्रदेश, सांस्कृतिक मध्यप्रदेश के सपने को साकार करने वाला है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी प्रदेश की जनता पर किसी नए कर बोझ नहीं डाला गया है। सुशासन और सुप्रबंधन के लिए निरंतर नवाचार और विकास के सभी पैमानों को पूरा करता यह बजट अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में वर्ष 2026- 27 का बजट प्रस्तुत होने के बाद यह विचार व्यक्त किए।जिसमें गरीब कल्याण, युवा शक्ति के कौशल विकास एवं रोजग़ारोन्मुखी प्रशिक्षण, अन्नदाता की आय में वृद्धि, नारी सशक्तिकरण, आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करने का संकल्प है। वर्ष 2026-27 के 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट में विकास के लिए पर्याप्त धन राशि रखी गई है, यह विकास और जनकल्याण के संकल्प की पूर्ति का परिचायक है।
डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
बजट में केवल बातों के बताशे बनाए गए हैं, जबकि जनहित पूरी तरह सफाचट है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की जनता से जो प्रमुख वादे किए थे, वे ढाई साल बाद भी बजट भाषण में नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और अन्य वर्गों से किए गए वादों को बजट में कोई स्थान नहीं दिया गया।किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया गया था।गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की गई थी।लाड़ली बहन योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 3 हजार रुपये देने की बात कही गई थी।घरेलू गैस सिलेंडर 450 रुपये में देने का वादा किया गया था।इन चारों घोषणाओं का बजट में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता, जिससे साफ है कि सरकार वादा- खिलाफी कर रही है।
कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री
मध्यप्रदेश सरकार ने 4,38,317 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया है। बजट में स्वयं के व्यय से 1,17,667 करोड़ का राजस्व प्राप्त का लक्ष्य है। केंद्र सरकार से 1,12,137 करोड़ प्राप्त होंगे। राज्य के स्वयं के कर राजस्व में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि से स्पष्ट है कि यह बजट प्रदेश के भविष्य को और सशक्त बनाने वाला है। पिछले वर्ष के अपेक्षा में पूंजीगत व्यय में 7.5 फीसदी की वृद्धि की गई है, जिससे प्रदेश का सर्वांगीण विकास और सशक्त होगा। बजट विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने के साथ जनकल्याण को नई ऊंचाई देगा। मध्यप्रदेश का बजट गरीब, युवा, नारी और किसानों की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त करेगा। बजट मध्यप्रदेश के समग्र विकास व सुदृढ़ अर्थव्यवस्था का दृष्टिपत्र है। प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को मध्यप्रदेश का बजट करेगा साकार। पूंजीगत व्यय को बढ़ाने से मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना साकार होगी।
हेमंत खंडेलवाल विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
यह बजट प्रदेश की जनता के साथ छलावा है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है। वित्तमंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपए से अधिक होगा। जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा यह बजट सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा है। किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया गया था, लेकिन बजट में इस पर कोई स्पष्ट नीति, योजना या समय सीमा नहीं है। किसान आज भी लागत और कर्ज के बोझ तले दबा है। जो एमएसपी के वादे किए गए थे वो भी पूरे नहीं हुए। प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि भर्ती, नई नौकरियों और रोजगार सृजन पर ठोस प्रावधान होंगे, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। संविदा भर्ती की बात कही गयी है, इससे नौकरी पाने वाले पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी।
उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष




