भोपाल (मध्य स्वर्णिम): स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का काम पूरा होते ही प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव की संभावना है। इसके तहत इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान समेत कई जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। कलेक्टरों को हटाए जाने के पीछे प्रशासनिक लापरवाही, पदोन्नति और तीन साल का कार्यकाल पूरा होना मुख्य वजह बताई जा रही है। हालांकि, इस दौरान विधानसभा का बजट सत्र भी जारी रहेगा, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार अफसरों को हटाए जाने के तुरंत बाद नए पदस्थ अधिकारियों की जॉइनिंग की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी कराएगी। एक मई से प्रस्तावित जनगणना के पहले इन बदलावों को जरूरी माना जा रहा है। 9 सितंबर 2025 को इंदौर कलेक्टर बनाए जाने से पहले शिवम वर्मा इंदौर नगर निगम के आयुक्त रहे थे। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्कालीन निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया था। हालांकि इंदौर के जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों का मानना है कि इस पूरे मामले की वास्तविक जिम्मेदारी उस समय प्रशासन संभाल रहे शिवम वर्मा की भी थी। ऐसे में एसआईआर के चलते अब तक बचे रहे शिवम वर्मा को हटाने का फैसला सरकार ले सकती है। कुछ ऐसी ही स्थिति ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के मामले में भी बताई जा रही है। ग्वालियर में पिछले महीने एक मामले में प्रशासनिक लापरवाही के लिए कलेक्टर को जिम्मेदार माना गया था। इसलिए उनके तबादले की भी संभावना जताई जा रही है। चौहान 11 मार्च 2024 से, लोकसभा चुनाव से पहले, यहां पदस्थ हैं। दूसरी ओर भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह सचिव पद पर पदोन्नत हो चुके हैं। ऐसे में उनका तबादला तय माना जा रहा है और उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय या किसी अन्य विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।




