धार (मध्य स्वर्णिम): भोजशाला मामले में सोमवार से एएसआई की 98-दिवसीय सर्वे रिपोर्ट इंदौर हाईकोर्ट में खोली जाएगी। इसी आधार पर स्थल के धार्मिक स्वरूप पर निर्णय होगा। अंतिम फैसले तक पूजा-नमाज व्यवस्था यथावत रहेगी और पक्षकारों को आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलेगा। भारतीय पुरातत्त्व विभाग के अधीन धार की ऐतिहासिक भोजशाला के भविष्य को लेकर सोमवार से हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। इसकी शुरुआत में पहले दिन एएसआई द्वारा प्रस्तुत की गई सर्वे की रिपोर्ट खोली जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय इंदौर में नियत है। सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की कोर्ट में 62वें नंबर पर होगी। सुनवाई के दौरान ही रिपोर्ट की प्रतियां हिंदू व मुस्लिम समाज के दोनों पक्षकारों सहित अभिभाषकों को उपलब्ध करवाई जाएगी। यह पहली मर्तबा होगा जब एएसआई की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने आएगी। क्योंकि अब एएसआई द्वारा किए गए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर ही भोजशाला का भविष्य और उसका धार्मिक स्वरूप तय होगा। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि भोजशाला का वास्तविक स्वरूप क्या है। व्यवस्था यथावत लागू रहेगी: पक्षकारों को अपनी आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक भोजशाला के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को जारी एएसआई के आदेश अनुसार पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, सभी कानूनी दलीलें हाईकोर्ट में खुली रहेंगी।
कोर्ट ने दिए थे अहम निर्देश:
दरअसल दो सप्ताह पहले 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी याचिका पर अहम निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी करने योग्य न हो।




