ग्वालियर (मध्य स्वर्णिम): जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे नौ साल के मासूम बच्चे ने अपने खून से पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से न्याय की गुहार लगाई है। मासूम ने शहर के एक नामी डॉक्टर पर बिना डिग्री-डिप्लोमा के दवाओं का अत्यधिक डोज देते हुए उसके शरीर में गंभीर बीमारी पैदा करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मामले में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं पिता-पुत्र ने भी एलान किया है कि अब यदि न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह कर लेंगे। दरअसल ग्वालियर का रहने वाला नौ साल का मासूम यशवर्धन राठौर तीसरी कक्षा में पढ़ता है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर आगमन की सूचना मिलने पर वह अपने पिता मोनू राठौर के साथ ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचा, जहां उसके द्वारा अपने खून से लिखा न्याय की गुहार वाला पत्र केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपा। सिंधिया ने पत्र को देखा और पिता पुत्र को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। जब सिंधिया एयरपोर्ट से रवाना हो रहे थे तब एक बार फिर पिता पुत्र उनके काफिले के सामने आ गए। सिंधिया ने काफिला रोक उनसे कहा कि वह बच्चे को न्याय जरूर दिलाएंगे। बता दें कि पिता मोनू राठौर का आरोप है कि उसके बेटे यशवर्धन के सिर पर उम्र के हिसाब से बाल कम थे। बालों की कम ग्रोथ को देखते हुए वह शिंदे की छावनी स्थित डर्मेटोलॉजिस्ट की क्लिनिक पर पहुंचे। जहां साल 2020 से 2024 तक उसका इलाज किया गया। इस दौरान आराम न मिलते हुए मासूम यशवर्धन के बाल पूरी तरह गायब हो गए। आंखों की रोशनी कम हो गई, दांत टेढ़े होने लगे। जब ग्वालियर में स्थानीय लेवल पर आयोजित एम्स भोपाल के मेडिकल केम्प में दिखाया तो उन्हें भोपाल जांच के लिए बुलाया, जहां शुरुआती जांच के बाद उन्हें दिल्ली एम्स रैफर किया गया।




