नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से संचालित देश के जितने भी वित्तीय संस्थान (बैंक, ग्रामीण बैंक, एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, सहकारी बैंक आदि) की तरफ से नामित रिकवरी एजेंट अब किसी भी सूरत में कर्ज चुकाने में असमर्थ रहने वाले या देरी करने वाले ग्राहकों से बदतमीजी से पेश नहीं आएंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बारे में विस्तृत लोन रिकवरी और रिकवरी एजेंट्स की नियुक्ति को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कि लोन चुकाने में असमर्थ या देरी करने वाले ग्राहकों को अनुचित दबाव से बचाना। अब बैंकों को सुनिश्चित करना होगा कि रिकवरी प्रक्रिया न केवल कानूनी हो, बल्कि मानवीय भी। पिछले कई वर्षों से रिकवरी एजेंट्स के गैर-कानूनी और अमानवीय व्यवहार की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। कई मामलों में एजेंट्स ने ग्राहकों को धमकी दी, अपशब्द कहे, परिवार को परेशान किया या यहां तक कि शारीरिक हिंसा की धमकी दी। कुछ रिपोर्ट्स में तो ऐसे मामले सामने आए जहां रिकवरी के दबाव में ग्राहकों ने आत्महत्या तक कर ली। उदाहरण के लिए 2023-2024 में कई राज्यों से ऐसी खबरें आईं जहां माइक्रोफाइनेंस लोन के रिकवरी एजेंट्स ने महिलाओं और किसानों को इतना तंग किया कि वे चरम कदम उठाने पर मजबूर हो गए। सबसे पहले, बैंकों को रिकवरी एजेंट्स की नियुक्ति से पहले उनकी योग्यता और पृष्ठभूमि की जांच करनी होगी। एजेंट्स को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) या इससे जुड़े संस्थानों से डेब्ट रिकवरी एजेंट का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा । बैंक को एक आचार संहिता बनानी होगी, जिसमें एजेंट्स और बैंक कर्मचारियों दोनों को शामिल किया जाएगा। बैंकों को बनानी होगी स्पष्ट नीति: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को अब एक स्पष्ट नीति बनानी होगी, जिसमें रिकवरी एजेंट्स की योग्यता, जांच, आचार संहिता और निगरानी शामिल हो। इससे विशेष रूप से वैसे लोगों को राहत मिलेगी जो रिकवरी के दौरान उत्पीडन का शिकार होते हैं।




