एआई तकनीक से होगी सिंहस्थ की भीड़ नियंत्रित

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उज्जैन (मध्य स्वर्णिम): उज्जैन में पहले चरण में कंपनी ने 287 करोड़ का निवेश कर एक यूनिट का निर्माण किया है, जहां प्लास्टिक की निर्भरता कम करने के लिए बायोमास सेल्यूलोज क्रास लिंक्ड तकनीक से नए उत्पाद बनाए जाएंगे। सिंहस्थ मेले में भीड़ नियंत्रण का प्रस्ताव भी भेजा गया है। प्रदेश में हुई इन्वेस्टर्स समिट के परिणाम अब सामने आने लगे हैं। तीन कोरियाई कंपनियों के साथ इसीडीएस कंपनी ने प्रदेश में 1265 करोड़ के निवेश की योजना सरकार को प्रस्तुत की है। कंपनी एआई के माध्यम से सिंहस्थ मेले में क्राउड मैनेजमेंट करना चाहती है। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा उज्जैन में पहले चरण में कंपनी ने 287 करोड़ का निवेश कर एक यूनिट का निर्माण किया है, जहां प्लास्टिक की निर्भरता कम करने के लिए बायोमास सेल्यूलोज क्रास लिंक्ड तकनीक से नए उत्पाद बनाए जाएंगे। ये पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं होंगे। कंपनी के राजेश भारद्वाज ने बताया कि सिंहस्थ मेले में पहले की तुलना में ज्यादा भीड़ आएगी। इस बार मेले में तकनीक का प्रयोग भी किया जाएगा। हम एआई के माध्यम से भीड़ नियंत्रित करने और उसकी संख्या का सटीक आंकड़ा सरकार को देंगे। हमारे पास इसकी उन्नत तकनीक है। कोरिया की कंपनी इसमें हमारी मदद करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में छह सेगमेंट में हम निवेश करेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा एविएशन स्किल डेवलपमेंट में भी हमारा निवेश होगा।

नई चमक के साथ लौट रहा लालबाग का दरबार हॉल, अगले हफ्ते से खुलेंगे दरवाजे:

इंदौर के ऐतिहासिक लालबाग पैलेस का दरबार हॉल नए रूप में पर्यटकों के सामने आने के लिए तैयार है। करीब दो महीने तक चले संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्य के बाद अगले हफ्ते से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। फिलहाल काम के चलते दरबार हॉल को पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था। लालबाग पैलेस के भीतर संरक्षण और फिनिशिंग का कार्य दिल्ली की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। पुराने एंटीक्स के संरक्षण के साथ दरबार हॉल के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए सुधार कार्य किए गए। नवंबर में फिनिशिंग और मरम्मत कार्य के चलते इसे बंद किया गया था। आईजीएनसीए की टीम ने दरबार हॉल को उसके मूल स्वरूप में ही नई चमक दी है। यहां किए गए स्टुको वर्क को पॉलिश और सफाई के साथ रीस्टोर किया गया। इसके लिए बड्स, रूई और छोटे ब्रशों की मदद से बेहद बारीकी से काम किया गया। छत पर लगे पानी के दाग भी साफ किए गए हैं और फॉल सीलिंग के कुछ हिस्सों में सुधार किया गया है।