इंदौर (मध्य स्वर्णिम): इंदौर की खतीपुरा बस्ती में रहने वाले लोग भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 32 मौतों के बाद अब पीने के पानी को लेकर सतर्क हो गए हैं। इस बस्ती में ज्यादातर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार रहते हैं। लोग अपनी आमदनी का एक हिस्सा पानी पर खर्च करने को मजबूर हैं, क्योंकि नलों का पानी अक्सर गंदा आता है। यहां के लोग रोजाना तीस रुपये खर्च कर पानी की केन खरीदकर प्यास बुझाते हैं । रहवासी बताते हैं कि जिनके घरों में बोरिंग है, उन्हें पानी की चिंता नहीं होती, लेकिन जो नर्मदा नल पर निर्भर हैं, उन्हें पानी खरीदना ही पड़ता है । खतीपुरा का एक हिस्सा नाले के ढलान पर स्थित है। कई वर्षो तक यहाँ नर्मदा की लाइन नही थी। जब बिछाई गई, तो ढलान के कारण पानी ठीक से नही आता । नल में शुरुआत के दस मिनट मटमैला पानी आता है और साफ पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है । शादी या अन्य आयोजनों में बस्तीवाले अब साफ पानी की केन खरीदकर ही पानी का इंतजाम करते हैं । महेश पाठक ने बताया कि हमने घर पर आरओ लगा रखा है ताकि हमारी तबियत खराब न हो। नर्मदा का पानी ऊँचाई वाले हिस्सो में नही आता । मोटर से पानी खींचने के अलावा कोई चारा नही है । लाइनों में जमा मटमैला पानी आता है। हमारा पूरा परिवार आर ओ से पानी साफ करके पीता है । श्यामा बाई कहती हैं, कब तक पानी खरीदकर पिएं ? मजबूरी में मन कड़ा करके पानी पी लेते हैं । कई बार इतना गंदा पानी आता है कि पीने का पानी खरीदना ही पड़ता है।




